थाईलैंड की राजमाता सिरीकित का 93 वर्ष की आयु में निधन

थाईलैंड की प्रिय और सम्मानित राजशाही हस्ती, क्वीन मदर सिरीकित (Queen Mother Sirikit) का शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025 को 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। रॉयल हाउसहोल्ड ब्यूरो (Royal Household Bureau) ने पुष्टि की कि उनका निधन बैंकॉक के एक अस्पताल में हुआ, जहाँ उन्हें 17 अक्टूबर से रक्त संक्रमण (blood infection) के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। निरंतर चिकित्सा देखभाल के बावजूद, उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

हाल के वर्षों में स्वास्थ्य गिरावट के कारण उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली थी। उनका निधन थाईलैंड के आधुनिक इतिहास के एक युग के अंत को दर्शाता है।

प्रारंभिक जीवन और शाही विवाह

सिरीकित किटियाकर (Sirikit Kitiyakara) का जन्म 12 अगस्त 1932 को बैंकॉक में हुआ था। वे चक्री राजवंश से जुड़ी एक अभिजात (noble) और कुलीन परिवार से थीं। उनके पिता प्रिंस नक्खात्रा मंगकला किटियाकर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद फ्रांस में थाईलैंड के राजदूत रहे।

पेरिस में पढ़ाई के दौरान, सिरिकिट की मुलाकात किंग भूमिबोल अदुल्यादेज़ (King Bhumibol Adulyadej) से हुई, जो उस समय स्विट्ज़रलैंड में अध्ययन कर रहे थे।
राजा के एक सड़क दुर्घटना के बाद दोनों के बीच मित्रता गहरी हुई और उन्होंने 1950 में विवाह किया।

उसी वर्ष हुए राज्याभिषेक (coronation) के दौरान, दोनों ने यह वचन लिया —

“हम न्याय और धर्म के साथ शासन करेंगे ताकि सियामी लोगों के लाभ और सुख के लिए कार्य हो।”

उनके चार बच्चे हुए —
किंग महा वजिरालोंगकोर्न, प्रिंसेस उबोलरतना, प्रिंसेस सिरिन्धोर्न, और प्रिंसेस चुलाभोर्न

थाईलैंड के विकास में योगदान

हालाँकि वे अपने पति राजा भूमिबोल की लोकप्रियता के कारण अक्सर छाया में रहीं, परंतु क्वीन सिरीकित ने अपने मानवीय और विकास कार्यों के माध्यम से एक अलग पहचान बनाई।

उन्होंने ग्रामीण जीवन सुधारने, गरीबी घटाने और थाईलैंड की पारंपरिक कलाओं को पुनर्जीवित करने के लिए अनेक राजकीय परियोजनाएँ (royal projects) शुरू कीं।

प्रमुख पहलें

  • SUPPORT फाउंडेशन (1976):
    ग्रामीणों को रेशम बुनाई, आभूषण निर्माण, चित्रकला, सिरेमिक, और अन्य पारंपरिक कलाओं में प्रशिक्षण देकर आय सृजन के अवसर दिए।

  • पर्यावरण संरक्षण:
    ग्रीन क्वीन (Green Queen)” के नाम से प्रसिद्ध, उन्होंने Forest Loves Water और Little House in the Forest जैसी परियोजनाएँ शुरू कीं, जो वन और जल संरक्षण के महत्व को दर्शाती थीं।

  • वन्यजीव संरक्षण:
    उन्होंने वन्यजीव प्रजनन केंद्र, खुले चिड़ियाघर, और कछुआ संरक्षण केंद्र स्थापित किए ताकि संकटग्रस्त प्रजातियों की रक्षा की जा सके।

इन पहलों ने ग्रामीण और शहरी समुदायों के बीच सेतु का कार्य किया और आर्थिक सशक्तिकरण व सतत विकास (sustainable development) को बढ़ावा दिया।

विवाद और सार्वजनिक आलोचना

थाईलैंड में सैन्य तख्तापलट (military coups) और राजनीतिक अस्थिरता के दशकों के दौरान, क्वीन सिरिकिट की भूमिका को कई बार राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना गया।
एक प्रदर्शनकारी के अंतिम संस्कार में उनकी उपस्थिति ने कभी-कभी राजशाही की राजनीतिक भूमिका पर बहस छेड़ दी। इसके बावजूद, उनकी लोकप्रियता — विशेष रूप से ग्रामीण जनता के बीच — अडिग रही। लोगों ने उन्हें राष्ट्रीय एकता और करुणा का प्रतीक माना।

एक युग का अंत

क्वीन मदर सिरीकित का निधन थाईलैंड के लिए गहरा भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण है। उनकी मानवीय दृष्टि, पर्यावरण प्रेम, और ग्रामीण उत्थान के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।

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vikash

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