NASA का ऐतिहासिक कदम: 50 वर्षों बाद मानव चंद्र मिशन की शुरुआत

नासा का आर्मिटस II मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों ने अमेरिका के फ्लोरिडा से उड़ान भरी है। यह चंद्रमा के चारों ओर घूमने की 10 दिन की बहुत महत्वपूर्ण यात्रा है। चीन की पहली मानव-युक्त लैंडिंग से पहले इंसानों को चंद्रमा की सतह पर भेजने की दिशा में अमेरिका का एक साहसी कदम माना जा रहा है। आर्मिटस II के क्रू सदस्य अंतरिक्ष में उस जगह तक जाएंगे, जहां तक इंसान पहले कभी नहीं पहुंचे हैं।

यह बहुत ही खास और ऐतिहासिक पल है, क्योंकि करीब 54 साल बाद इंसान फिर से चांद की ओर जा रहा है। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, मिशन कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन। तीन साल की ट्रेनिंग के बाद चार सदस्यों का यह क्रू नासा के आर्टिम कार्यक्रम में उड़ान भर रहा है।

इस मिशन का उद्देश्य

यह कार्यक्रम साल 2017 में शुरू किए गए कई अरब डॉलर के मिशनों की एक श्रृंखला है। इसका उद्देश्य अगले दशक और उसके बाद चंद्रमा पर अमेरिका की लंबे समय तक मौजूदगी सुनिश्चित करना है। नासा ने बतया है कि ओरियन अंतरिक्ष यान ‘डीप स्पेस नेटवर्क’ के साथ संपर्क में है। 50 सालों में पहली बार नासा को एक ऐसे अंतरिक्ष यान से सिग्नल मिल रहा है, जो इंसानों को लेकर चांद की ओर बढ़ रहा है।

चार एस्ट्रोनॉट में तीन पुरुष और एक महिला

आर्मिटस II के चार एस्ट्रोनॉट में तीन पुरुष और एक महिला है। चांद पर जा रही नासा टीम में अमेरिकी नागरिक रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच के साथ कनाडाई नागरिक जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। यह टीम 10 दिनों के मिशन पर चंद्रमा पर उतरे बिना पृथ्वी के उपग्रह का चक्कर लगाएगी। दरअसल क्रू का गमड्रॉप के आकार का ओरियन कैप्सूल पृथ्वी की कक्षा में उड़ान के साढ़े तीन घंटे बाद SLS के ऊपरी चरण से अलग होगा। इसके बाद अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष यान का मैनुअल कंट्रोल अपने हाथ में लेकर उसकी स्टीयरिंग और मैन्यूवरेबिलिटी की जांच करेंगे।

क्रू 25 घंटे पृथ्वी के चारों ओर एक ऊंची

क्रू 25 घंटे पृथ्वी के चारों ओर एक ऊंची, अंडाकार कक्षा में चक्कर लगाते हुए बिताएंगे और अलग हुए ऊपरी चरण को करीब से गुजरने वाले मैन्यूवर के लिए टारगेट के तौर पर इस्तेमाल करेंगे। ऑटोमेटेड सिस्टम के बजाय अपनी आंखों से देखकर अनुमान लगाने पर भरोसा करते हुए वे ओरियन को उस चरण से 10 मीटर दूर ले जाएंगे।

गुरुत्वाकर्षण बल का इस्तेमाल

योजना के अनुसार चीजें हुईं तो ओरियन का मुख्य इंजन क्रू को चांद की ओर एक ‘फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी’ पर आगे बढ़ाएगा। यह एक ऐसा रास्ता है, जो पृथ्वी और चांद के गुरुत्वाकर्षण बल का इस्तेमाल करके अंतरिक्ष यान को वापस घर ले आता है। यह मिशन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से 252,000 मील (406,000 km) दूर ले जाएगा।

आर्मिटस II क्यों है खास?

आर्मिटस II इस पूरे कार्यक्रम का दूसरा और बेहद अहम मिशन है। यही वो मिशन है जो इंसानों को एक बार फिर चांद की दिशा में लेकर जाएगा। यह सीधे चांद पर लैंड नहीं करेगा, लेकिन चांद के आसपास उड़ान भरकर आगे के मिशनों की तैयारी करेगा।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

G7 Summit 2026: फ्रांस में दुनिया के 7 सबसे ताकतवर देशों की बैठक, जानिए 13 बड़े फैसले और भारत के लिए क्यों है खास

दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कई बड़े फैसलों का मंच माने जाने…

4 weeks ago

दुनिया का सबसे जहरीला बिच्छू कौन सा है?, जानें कहाँ पाए जाते हैं सबसे ज्यादा बिच्छू

धरती पर मौजूद सबसे डरावने जीवों में बिच्छू (Scorpion) का नाम जरूर लिया जाता है।…

2 months ago

भारत में कहाँ है एशियाई शेरों का असली घर? दुनिया की इकलौती जगह जहाँ जंगल में आज़ादी से घूमते हैं Asiatic Lions

शेरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में अफ्रीका के विशाल जंगलों की तस्वीर…

2 months ago

भारत का कौन-सा राज्य कहलाता है “Spice Garden of India”? जिसके मसालें दुनिया-भर में है मशहूर

भारत अपने मसालों के लिए सदियों से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय मसालों…

2 months ago

भारत का सबसे अमीर गांव कौन-सा है? यहां हर घर में करोड़ों की संपत्ति, बैंक में जमा हैं हजारों करोड़

भारत गांवों का देश कहा जाता है। यहां लाखों गांव हैं, जिनमें से कई आज…

2 months ago

क्या आप जानते हैं भारत का Tea Capital कौन-सा राज्य है? यहां उगती है सबसे ज्यादा चाय

रेलवे स्टेशन हो, ऑफिस हो या गांव की चौपाल — चाय हर जगह लोगों की…

2 months ago