वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में भारत ने एक रणनीतिक कदम उठाया है। सरकार ने गुजरात के धोलेरा में टाटा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) को मंज़ूरी दे दी है। इस पहल को ₹91,000 करोड़ के भारी-भरकम निवेश का समर्थन प्राप्त होगा, और इस परियोजना के माध्यम से देश की पहली चिप फैब्रिकेशन यूनिट स्थापित की जाएगी। उम्मीद है कि यह पहल घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देगी, आयात पर निर्भरता कम करेगी और हज़ारों रोज़गार के अवसर पैदा करेगी।
सरकार ने धोलेरा में टाटा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड के लिए स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) को आधिकारिक तौर पर नोटिफ़ाई कर दिया है।
यह SEZ इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर और IT/ITeS सेवाओं पर फ़ोकस करेगा, जिससे यह एक पूरी तरह से टेक्नोलॉजी हब बन जाएगा।
इस प्रोजेक्ट में ₹91,000 करोड़ का निवेश भी शामिल है, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर पहलों में से एक बन गया है।
मुख्य बातें ये हैं:
यह SEZ गुजरात के धोलेरा में 66.16 हेक्टेयर ज़मीन पर विकसित किया जाएगा।
धोलेरा, भारत में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक अहम डेस्टिनेशन के तौर पर तेज़ी से उभर रहा है।
विशेष आर्थिक क्षेत्र देश के भीतर ऐसे खास इलाके होते हैं, जहाँ व्यापार और वाणिज्य से जुड़े कानून देश के बाकी हिस्सों से अलग होते हैं।
ये क्षेत्र निम्नलिखित सुविधाएँ प्रदान करते हैं:
इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा व्यवसाय-अनुकूल वातावरण तैयार करना है, जो उद्योगों को अपने परिचालन स्थापित करने और निर्यात का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करे।
भारत में SEZ की यात्रा आज़ादी के कुछ ही समय बाद शुरू हो गई थी।
31 मार्च, 2024 तक भारत में 280 से ज़्यादा चालू SEZ हैं, जो अर्थव्यवस्था में उनके महत्व को दर्शाते हैं।
टाटा के सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट के अलावा, कई अन्य SEZ को भी मंज़ूरी दी गई है।
यह पूरे भारत में सेमीकंडक्टर निवेश के बढ़ते इकोसिस्टम को दर्शाता है।
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