तमिलनाडु में वार्षिक जलीकट्टू सत्र की शुरुआत वर्ष 2026 की शुरुआत में होने जा रही है। राज्य सरकार ने 3 जनवरी 2026 को पहले जलीकट्टू आयोजन की अनुमति प्रदान की है। यह पारंपरिक सांड-वश में करने का खेल पुडुकोट्टई ज़िले के थाचनकुरिची गांव में आयोजित होगा। यह आयोजन नियमन और सुरक्षा मानकों के तहत तमिलनाडु की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाता है।
तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक रूप से 3 जनवरी को पुडुकोट्टई ज़िले के थाचनकुरिची गांव में जलीकट्टू 2026 के पहले आयोजन की अनुमति दी है। यह अनुमति पशुपालन, दुग्ध, मत्स्य एवं मछुआ कल्याण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के माध्यम से दी गई है, जिससे राज्य में जलीकट्टू सत्र की औपचारिक शुरुआत होती है।
जलीकट्टू आयोजन की अनुमति सरकारी गजट के माध्यम से जारी की गई है। यह आयोजन पुडुकोट्टई ज़िले के थाचनकुरिची गांव में होगा। परंपरागत रूप से हर वर्ष जलीकट्टू सत्र का पहला आयोजन यहीं किया जाता है, जिससे इस गांव को विशेष सांस्कृतिक महत्व प्राप्त है।
यह आयोजन पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (तमिलनाडु संशोधन अधिनियम, 2017) के अंतर्गत स्वीकृत किया गया है। इस संशोधन के तहत जलीकट्टू को एक पारंपरिक खेल के रूप में नियमन के साथ अनुमति दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आयोजन के दौरान सभी कानूनी प्रावधानों और न्यायालय द्वारा निर्धारित सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन किया जाएगा।
अधिसूचना के अनुसार जलीकट्टू आयोजन राज्य सरकार तथा पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाओं के निदेशक द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) के अनुसार ही होगा। जिला प्रशासन को भीड़ नियंत्रण, जन सुरक्षा, पशु कल्याण और आपातकालीन प्रबंधन (आपदा प्रबंधन सहित) सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने दोहराया है कि जलीकट्टू एवं अन्य पारंपरिक आयोजनों के लिए आवेदन केवल निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। मैनुअल आवेदन मान्य नहीं होंगे। इससे पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही बढ़ेगी तथा आयोजकों द्वारा सुरक्षा व कल्याण दिशानिर्देशों के पालन को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
थाचनकुरिची को जलीकट्टू सत्र के पारंपरिक उद्घाटन स्थल के रूप में विशेष सांस्कृतिक पहचान प्राप्त है। पुडुकोट्टई ज़िला तमिलनाडु में सबसे अधिक ‘वाडीवासल’ (वह द्वार जहाँ से सांड छोड़े जाते हैं) के लिए जाना जाता है, जो जलीकट्टू आयोजनों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2025 में लगभग 600 सांडों और 350 तामरों (सांड पकड़ने वाले प्रतिभागी) ने भाग लिया था, जबकि 4,500 से अधिक दर्शक मौजूद थे। इस दौरान सांड मालिकों, तामरों, दर्शकों और एक सांड को चोटें आई थीं। 2024 में 700 से अधिक सांडों ने भाग लिया और 22 लोग घायल हुए, जिससे सख्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता रेखांकित होती है।
जलीकट्टू तमिल संस्कृति और फसल उत्सवों, विशेष रूप से पोंगल, से जुड़ा एक पारंपरिक खेल है। वर्षों से यह परंपरा और पशु कल्याण के बीच बहस का विषय रही है। कानूनी चुनौतियों के बाद तमिलनाडु सरकार ने संशोधन कर इसे नियमन और सुरक्षा शर्तों के साथ आयोजित करने की अनुमति दी है।
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