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सुप्रीम कोर्ट ने भूटान के टॉप कोर्ट से किया एमओयू

भारत और भूटान के बीच न्यायिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भूटान के साथ युवा विधि पेशेवरों (लॉ क्लर्क्स) के आदान-प्रदान के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस घोषणा की जानकारी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने दी और भूटान से आए दो लॉ क्लर्क्स का सर्वोच्च न्यायालय में स्वागत किया।

क्यों खबर में है?

भारत और भूटान के बीच एक MoU पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके तहत भूटान के लॉ क्लर्क्स भारत के सर्वोच्च न्यायालय में कार्य करेंगे। इस पहल का उद्देश्य न्यायिक आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देना है।

MoU के बारे में

इस समझौते की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं—

  • भूटान के दो लॉ क्लर्क भारत के सर्वोच्च न्यायालय में कार्य करेंगे।
  • उनका कार्यकाल तीन माह का होगा।
  • उन्हें भारतीय लॉ क्लर्क्स के समान मानदेय दिया जाएगा।
  • यात्रा व्यय भारत का सर्वोच्च न्यायालय वहन करेगा।

समझौते की पृष्ठभूमि

यह पहल दोनों देशों के बीच विकसित हो रहे न्यायिक सहयोग को दर्शाती है—

  • अक्टूबर 2025 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने भूटान का दौरा किया था।
  • इस दौरान भारत और भूटान ने न्यायिक संबंधों को गहरा करने पर सहमति जताई।
  • सहयोग के क्षेत्रों में तकनीकी एकीकरण और क्षमता निर्माण शामिल हैं।

पहल का महत्व

यह MoU दोनों देशों के लिए कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है—

  • भारत और भूटान के बीच न्यायिक कूटनीति को मजबूती मिलती है।
  • भूटानी न्यायपालिका को भारत की विधिक प्रणाली को समझने और अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
  • यह पहल भारत की ‘पड़ोसी पहले’ (Neighbourhood First) नीति के तहत क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देती है।
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