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नाटो साइबर रक्षा समूह में शामिल होने वाला पहला एशियाई देश बना दक्षिण कोरिया

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दक्षिण कोरिया, उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organization – NATO) के कोऑपरेटिव साइबर डिफेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Cooperative Cyber Defence Centre of Excellence – CCDCOE) में शामिल होने वाला पहला एशियाई देश बन गया है। दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय खुफिया सेवा (National Intelligence Service – NIS), नाटो के कोऑपरेटिव साइबर डिफेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में एक योगदानकर्ता के रूप में शामिल हुई है। साइबर सिक्योरिटी रिसर्च, ट्रेनिंग को ध्यान में रखते हुए इसकी स्थापना मई 2008 में हुई थी।


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अब NATO CCDCOE में कुल आधिकारिक सदस्यों के रूप में 32 देश शामिल हैं, जिसमें 27 नाटो सदस्य देश और 5 ग़ैर-नाटो राज्य शामिल हैं, जो योगदानकर्ता के रूप में हैं। दक्षिण कोरिया ने लॉक्ड शील्ड्स 2022 में भाग लिया है। यह दुनिया में सबसे बड़ा और सबसे जटिल वार्षिक अंतरराष्ट्रीय लाइव-फायर साइबर रक्षा अभ्यास है। यह साल 2020 से लगातार दो वर्षों से भाग ले रहा है। दक्षिण कोरिया CCDCOE में शामिल होने से उत्तर कोरिया के कारण साइबर सुरक्षा खतरे की धारणा का मुक़ाबला करने में मदद करेगा।

नाटो के बारे में (About the NATO):

NATO का पूरा नाम उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organization), जिसे उत्तरी अटलांटिक गठबंधन (North Atlantic Alliance) भी कहा जाता है। इसमें 28 यूरोपियन देश और दो उत्तरी अमेरिका की देश शामिल है। NATO को फ्रेंच में OTAN कहते है जो पूरी तरह से नाटो का उल्टा है। नाटो का मुख्य उद्देश्य राजनितिक एवं सैन्य साधनों के माध्यम से अपने सदस्य देशों को स्वतंत्रता एवं सुरक्षा की गारंटी प्रदान करना है।

  • स्थापना: सन् 1949 में।
  • मुख्यालय: ब्रसेल्स, बेल्जियम।

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