2024 में दक्षिण एशिया ने बाल टीकाकरण में अब तक की सर्वोच्च उपलब्धि हासिल की

यूनिसेफ़ और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण एशिया ने वर्ष 2024 में बच्चों के टीकाकरण में अब तक का सर्वोच्च स्तर प्राप्त कर लिया है। यह उपलब्धि डिप्थीरिया, खसरा और रूबेला जैसी घातक लेकिन रोकी जा सकने वाली बीमारियों से लाखों बच्चों को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस सफलता के पीछे सरकारों की निरंतर प्रतिबद्धता, नवाचारपूर्ण सेवा वितरण मॉडल, और हर बच्चे तक—यहाँ तक कि दूर-दराज़ के क्षेत्रों में रहने वालों तक—पहुंचने के लिए किए गए व्यापक प्रयास शामिल हैं।

पृष्ठभूमि और संदर्भ
दक्षिण एशिया, जो विश्व की बड़ी जनसंख्या का घर है, लंबे समय से सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों में बाल टीकाकरण को एक मुख्य आधार मानता रहा है। हालांकि, कोविड-19 महामारी के दौरान नियमित टीकाकरण सेवाएं बाधित हो गई थीं। लेकिन 2024 में टीकाकरण स्तर न केवल पूर्व-कोविड स्तरों तक लौटा, बल्कि उससे आगे भी बढ़ा, जो यह दर्शाता है कि बच्चों के जीवन और विकास पर केंद्रित स्वास्थ्य पहलों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

उद्देश्य और लक्ष्य
दक्षिण एशिया की इस टीकाकरण पहल का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी बच्चों को जीवनरक्षक टीकों तक समान रूप से पहुंच मिले, रोकी जा सकने वाली बीमारियों के प्रकोप को घटाया जाए और बाल मृत्यु दर में कमी लाई जाए। DTP (डिप्थीरिया, टेटनस, पर्टुसिस) और खसरे जैसे टीके स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और राष्ट्रीय नीति की प्रभावशीलता के महत्वपूर्ण संकेतक हैं। इस अभियान का लक्ष्य केवल ऊँची कवरेज नहीं, बल्कि समानता भी है—ताकि शून्य-खुराक (zero-dose) बच्चों तक भी पहली बार टीकाकरण पहुंचे।

2024 के प्रमुख आँकड़े
2024 में दक्षिण एशिया में 92% शिशुओं को DTP का तीसरा डोज़ मिला, जो 2023 में 90% था। पहले डोज़ की कवरेज 95% तक पहुँच गई। एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि शून्य-खुराक बच्चों की संख्या में 27% की गिरावट दर्ज की गई—2023 में 25 लाख से घटकर 2024 में 18 लाख रह गए। भारत ने इस मोर्चे पर 43% की गिरावट के साथ उल्लेखनीय प्रदर्शन किया—16 लाख से घटकर 9 लाख। नेपाल ने 52% की गिरावट दर्ज की।

पाकिस्तान ने अपने इतिहास की सबसे ऊँची DTP3 कवरेज 87% दर्ज की, जबकि अफगानिस्तान क्षेत्र में सबसे पीछे रहा और वहाँ थोड़ी गिरावट देखी गई। खसरे के टीकाकरण में, पहले डोज़ की कवरेज 93% और दूसरे डोज़ की 88% तक पहुंच गई, जिससे खसरे के मामलों में एक वर्ष में 90,000 से घटकर 55,000 तक 39% की गिरावट आई।

HPV टीकाकरण पर ध्यान
2024 में क्षेत्र ने HPV टीकाकरण (जो सर्वाइकल कैंसर से बचाता है) में भी प्रगति की—इसके तहत कवरेज 2% (2023) से बढ़कर 9% (2024) हो गई। बांग्लादेश, भूटान, मालदीव और श्रीलंका ने विशेष प्रगति की। नेपाल ने फरवरी 2025 में HPV कार्यक्रम शुरू कर 14 लाख लड़कियों को कवर कर लिया है। भारत और पाकिस्तान इस वर्ष के अंत तक अपने HPV टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करने वाले हैं।

सरकारी प्रयास और सहयोग
दक्षिण एशिया में यह सफलता मजबूत सरकारी नेतृत्व, वित्तीय निवेश और महिला-प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी का परिणाम है। सरकारों ने डिजिटल ट्रैकिंग टूल्स, जागरूकता अभियानों और डेटा निगरानी प्रणालियों का उपयोग कर यह सुनिश्चित किया कि कोई बच्चा या किशोर पीछे न छूटे। यूनिसेफ़, WHO, स्थानीय विनिर्माताओं और अंतरराष्ट्रीय दाताओं के सहयोग से ये प्रयास संभव हो सके, जिससे स्वास्थ्य प्रणाली में लोगों का विश्वास भी बहाल हुआ।

महत्त्व
हालांकि आंकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन चुनौतियाँ अब भी मौजूद हैं। पूरे क्षेत्र में अभी भी 29 लाख से अधिक बच्चे अधूरे या बिना टीकाकरण के हैं। WHO और यूनिसेफ़ ने सरकारों से अपील की है कि वे घरेलू वित्तपोषण बढ़ाएँ, HPV कवरेज को विस्तारित करें और स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता निर्माण में निवेश करें ताकि दूरस्थ और हाशिए पर रहने वाली आबादी तक भी टीकाकरण पहुँचे। 2024 की यह सफलता दर्शाती है कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति, सामुदायिक विश्वास और वैश्विक सहयोग एक साथ आते हैं, तो असाधारण उपलब्धियाँ संभव होती हैं।

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vikash

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