दक्षिण अफ्रीका ने पशु स्वास्थ्य संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है। 7 फरवरी 2026 को देश का लगभग 20 वर्षों में पहला स्वदेशी फुट-एंड-माउथ डिज़ीज़ (एफएमडी) वैक्सीन पेश किया गया। यह वैक्सीन स्थानीय स्तर पर कृषि अनुसंधान परिषद (Agricultural Research Council) द्वारा विकसित और निर्मित की गई है। इसका उद्देश्य रोग नियंत्रण को मजबूत करना, पशुपालकों और पशुधन की सुरक्षा करना तथा आयातित टीकों पर निर्भरता कम करना है। अधिकारियों के अनुसार, यह पहल पशुधन को नुकसान पहुँचाने वाली गंभीर बीमारियों में से एक के खिलाफ विज्ञान-आधारित और सक्रिय प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है।
दक्षिण अफ्रीका में हाल ही में लॉन्च किया गया फुट-एंड-माउथ डिज़ीज़ (एफएमडी) वैक्सीन लगभग दो दशकों में देश में स्थानीय स्तर पर विकसित किया गया पहला वैक्सीन है। जोहान्सबर्ग में इसके शुभारंभ के दौरान कृषि मंत्री जॉन स्टीनहुइज़न ने 12,900 प्रारंभिक खुराकों की उपलब्धता की घोषणा की। इस वैक्सीन का विकास और उत्पादन कृषि अनुसंधान परिषद (Agricultural Research Council) द्वारा किया गया है। मार्च 2026 तक इसका साप्ताहिक उत्पादन 20,000 खुराकों तक बढ़ने की उम्मीद है, जिससे देशभर में व्यापक कवरेज सुनिश्चित होगी।
यह नया एफएमडी वैक्सीन आयातित टीकों पर दक्षिण अफ्रीका की निर्भरता को काफी हद तक कम करता है, जो अक्सर महंगे होते हैं और वैश्विक आपूर्ति बाधाओं से प्रभावित रहते हैं। सरकार के अनुसार, स्थानीय उत्पादन से पशु-स्वास्थ्य सुरक्षा मजबूत होती है और बीमारी के प्रकोप पर तेज़ प्रतिक्रिया संभव होती है। यह पहल प्रतिक्रियात्मक रोग नियंत्रण से आगे बढ़कर निवारक और विज्ञान-आधारित पशुधन प्रबंधन की दीर्घकालिक रणनीति को समर्थन देती है, जिससे किसानों की उत्पादकता सुरक्षित रहती है और अचानक होने वाले प्रकोपों से होने वाले आर्थिक नुकसान में कमी आती है।
फुट-एंड-माउथ डिज़ीज़ एक अत्यंत संक्रामक वायरल रोग है, जो गाय, भैंस, सूअर, भेड़ और बकरियों जैसे खुरदार पशुओं को प्रभावित करता है। इससे बुखार और मुंह, खुरों तथा थनों पर दर्दनाक फफोले बनते हैं, जिससे दूध उत्पादन और मांस उत्पादन में तेज़ गिरावट आती है। वयस्क पशु अक्सर ठीक हो जाते हैं, लेकिन कम उम्र के पशुओं में मायोकार्डाइटिस जैसी जटिलताओं के कारण मृत्यु दर अधिक होती है। यह रोग पशुधन व्यापार और ग्रामीण आजीविका को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
फुट-एंड-माउथ डिज़ीज़ वायरस के सभी सात ज्ञात सीरोटाइप्स वन्यजीव आबादी में पाए गए हैं। अफ्रीका में अफ्रीकी भैंस को इस वायरस का प्रमुख वाहक और दीर्घकालिक भंडार माना जाता है। हालांकि अन्य वन्यजीव भी संक्रमित हो सकते हैं, लेकिन उन्हें स्थायी मेज़बान नहीं माना जाता। वन्यजीव-पशुधन संपर्क के कारण दक्षिण अफ्रीका में एफएमडी नियंत्रण विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है, जिससे व्यापक टीकाकरण और निगरानी कार्यक्रमों का महत्व बढ़ जाता है।
दक्षिण अफ्रीका के कृषि विभाग के अनुसार, घरेलू वैक्सीन का रोल-आउट विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन के साथ एफएमडी-मुक्त दर्जा पुनः प्राप्त करने के प्रयासों को समर्थन देता है। यह दर्जा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की पशु-स्वास्थ्य प्रणाली पर भरोसा बहाल करने और पशुधन व पशु-उत्पादों के निर्यात बाजारों को फिर से खोलने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह वैक्सीन प्रकोप नियंत्रण और दीर्घकालिक रोग प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने में सहायक साबित होने की उम्मीद है।
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