भारत और अमरीका ने अंतरिम व्यापार समझौता फ्रेमवर्क की घोषणा की

भारत और अमेरिका ने अपने आर्थिक संबंधों को नया आकार देने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया है। 7 फ़रवरी 2026 को दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे की घोषणा की, जिसका उद्देश्य टैरिफ में कटौती, बाज़ार तक पहुंच को आसान बनाना और आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करना है। यह पहल भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर चल रही वार्ताओं को और गति देती है तथा संतुलित और पारस्परिक व्यापार के साझा लक्ष्य को दर्शाती है। यह समझौता वस्तुओं, कृषि, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और डिजिटल व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों को कवर करता है, जो दीर्घकालिक आर्थिक तालमेल और रणनीतिक साझेदारी के संकेत देता है।

अमेरिका–भारत अंतरिम व्यापार ढांचा: क्या तय हुआ है

अमेरिका–भारत अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा पारस्परिक और संतुलित लाभ पर आधारित व्यापार की नींव रखता है। इसमें त्वरित टैरिफ समायोजन, बाज़ार तक पहुंच और नियामकीय सहयोग पर ज़ोर दिया गया है, साथ ही अंतिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की राह तैयार की गई है। दोनों पक्षों ने प्रतीकात्मक घोषणाओं के बजाय ठोस परिणामों के प्रति प्रतिबद्धता जताई है। यह ढांचा विश्वास, संतुलन और साझा आर्थिक प्राथमिकताओं का संकेत देता है तथा व्यापक दीर्घकालिक व्यापार संधि की ओर एक सेतु के रूप में उभरता है।

टैरिफ कटौती और बाज़ार पहुंच

इस ढांचे की प्रमुख विशेषता टैरिफ का युक्तिकरण है। भारत अमेरिका के औद्योगिक और कृषि उत्पादों—जैसे खाद्य तेल, पशु आहार, फल-मेवे, वाइन और स्पिरिट्स—पर शुल्क कम या समाप्त करेगा। इसके बदले अमेरिका भारतीय वस्तुओं—कपड़ा, चमड़ा, रसायन, हस्तशिल्प और मशीनरी—पर पहले लगाए गए अधिक शुल्कों के स्थान पर 18% का पारस्परिक टैरिफ लागू करेगा। इससे द्विपक्षीय व्यापार में प्रतिस्पर्धा और पूर्वानुमेयता बढ़ने की उम्मीद है।

विमानन, फार्मा और रणनीतिक क्षेत्रों को राहत

अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लगाए गए भारत-निर्मित विमानों और विमान-पुर्ज़ों पर टैरिफ हटाने पर सहमति दी है। भारत को ऑटोमोबाइल पुर्ज़ों के लिए प्राथमिक टैरिफ-रेट कोटा भी मिलेगा। जांच के अधीन, भारतीय जेनेरिक दवाओं को भी बातचीत के जरिए राहत मिल सकती है। ये कदम विमानन, ऑटो कंपोनेंट्स और फार्मा जैसे निर्यात व रोज़गार-प्रधान क्षेत्रों को बल देंगे।

गैर-टैरिफ बाधाएं और मानक

टैरिफ से आगे बढ़ते हुए, ढांचा लंबे समय से चली आ रही गैर-टैरिफ बाधाओं को भी संबोधित करता है। भारत अमेरिकी मेडिकल डिवाइसेज़, आईसीटी आयात और खाद्य उत्पादों से जुड़ी कुछ पाबंदियों में ढील देगा। दोनों देश मानकों, अनुरूपता आकलन और परीक्षण आवश्यकताओं पर सहयोग करेंगे, जिससे अनुपालन आसान होगा। यह पारदर्शिता और निवेशकों के भरोसे को मजबूत करेगा।

आपूर्ति शृंखलाएं, प्रौद्योगिकी और डिजिटल व्यापार

समझौते में आपूर्ति शृंखला लचीलापन और आर्थिक सुरक्षा पर विशेष ध्यान है। दोनों देश तीसरे देशों की गैर-बाज़ार प्रथाओं का मुकाबला करने, निर्यात नियंत्रण और निवेश जांच में समन्वय करेंगे। तकनीकी व्यापार—विशेषकर GPUs और डेटा-सेंटर से जुड़े उत्पाद—का विस्तार होगा। साथ ही, भविष्य के BTA के तहत मज़बूत डिजिटल व्यापार नियमों, भेदभाव-रोधी उपायों और नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

भारत की 500 अरब डॉलर की खरीद प्रतिबद्धता

इस ढांचे का एक बड़ा आकर्षण अगले पाँच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने की भारत की मंशा है। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान, कीमती धातुएं, तकनीकी वस्तुएं और कोकिंग कोयला शामिल हैं। यह प्रतिबद्धता ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करती है, औद्योगिक सहयोग बढ़ाती है और भारत को केवल व्यापारिक भागीदार नहीं, बल्कि रणनीतिक आर्थिक साझेदार के रूप में स्थापित करती है।

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vikash

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