भारत एक नए बैंकिंग सुधार युग की तैयारी में है, जहाँ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा का लक्ष्य है — भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप विश्व-स्तरीय, बड़े और प्रतिस्पर्धी बैंक तैयार करना। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय (mergers) से लेकर नियामकीय ढांचे (regulatory framework) को सरल बनाने तक, यह पहल देश की वित्तीय प्रणाली को मजबूत, आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था को अब “ग्लोबल स्केल” पर काम करने वाले बैंकों की जरूरत है। उद्योग, MSME और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में ऋण की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बैंकों को अपनी पूंजी और क्रेडिट क्षमता दोनों का विस्तार करना होगा।
वित्त मंत्रालय, RBI और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बीच “स्केल बिल्डिंग” को लेकर विचार-विमर्श जारी है। उद्देश्य है —
वित्तीय समावेशन के साथ-साथ आर्थिक विकास को गति देना
बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग क्षमता बढ़ाना
बैंकिंग नवाचार (innovation) और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देना
सीतारमण ने कहा कि बैंक विलय (merger) एक रास्ता है, लेकिन व्यापक लक्ष्य है “विकास, समावेशन और नवाचार पर आधारित बैंकिंग इकोसिस्टम” तैयार करना।
2017 में जहाँ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक 27 थे, वहीं 2020 तक इनकी संख्या घटकर 12 रह गई — जिससे दक्षता, पूंजी पर्याप्तता (capital adequacy) और प्रबंधन क्षमता में सुधार हुआ।
यूनाइटेड बैंक + ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स → पंजाब नेशनल बैंक
सिंडिकेट बैंक → केनरा बैंक
इलाहाबाद बैंक → इंडियन बैंक
आंध्रा बैंक + कॉर्पोरेशन बैंक → यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
देना बैंक + विजया बैंक → बैंक ऑफ बड़ौदा
एसबीआई की 5 सहयोगी बैंकें + भारतीय महिला बैंक → स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
इन विलयों से बने बड़े बैंक अब इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय जरूरतों को संभालने में सक्षम हैं।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत के बैंक अब पहले से अधिक पूंजीगत रूप से मजबूत, पारदर्शी और सक्षम हैं। इससे RBI को नियमन में लचीलापन लाने और बैंकों को विकास-उन्मुख नीतियों का समर्थन देने की अनुमति मिलती है।
बैंकों को अधिग्रहण (acquisition) वित्तपोषण में अब स्वतंत्रता दी गई है
IPO से संबंधित ऋण सीमा (loan caps) बढ़ाई गई है
बैंकों को नवाचार-अनुकूल और जोखिम-संवेदनशील (risk-based) ढंग से संचालित करने पर बल दिया गया है
मल्होत्रा ने कहा कि RBI “निगरानी तो करेगा, पर निर्णय बैंकों के बोर्ड के हाथ में रहेगा”। नियमन और स्वतंत्रता के बीच यह संतुलन भारतीय बैंकिंग को अधिक लचीला और प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
वित्त मंत्रालय और RBI के बीच स्पष्ट नीतिगत सामंजस्य (policy alignment) देखने को मिल रहा है, जिसका लक्ष्य है —
वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी वित्तीय संस्थान तैयार करना
पूंजी वितरण तंत्र को अधिक कुशल बनाना
डिजिटल रूप से एकीकृत बैंकिंग सेवाएं विकसित करना
टिकाऊ (sustainable) और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को समर्थन देना
वर्तमान वित्त मंत्री: निर्मला सीतारमण
RBI गवर्नर (2025): संजय मल्होत्रा
2017 में सार्वजनिक बैंकों की संख्या: 27
2020 तक विलयों के बाद: 12 बैंक
लक्ष्य: विश्व-स्तरीय भारतीय बैंकिंग तंत्र का निर्माण
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