शहीद दिवस (Shaheed Diwas) हर साल 30 जनवरी को महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की याद में मनाया जाता है, जिनकी 1948 में नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) द्वारा बिड़ला हाउस में गांधी स्मृति में हत्या कर दी गई थी। इस वर्ष राष्ट्र ने 74वां शहीद दिवस मनाया। यह दिन भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष में स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किए गए बलिदानों को याद करने और उन्हें सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। विशेष रूप से, भारत में शहीद दिवस 23 मार्च को भगत सिंह (Bhagat Singh), शिवराम राजगुरु (Shivaram Rajguru) और सुखदेव थापर (Sukhdev Thapar) को सम्मान देने के लिए भी मनाया जाता है, जिन्हें 1931 में इसी दिन फाँसी पर लटका दिया गया था।’
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दिन का महत्व:
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधान मंत्री और रक्षा मंत्री 30 जनवरी को राजघाट पर महात्मा गांधी की समाधि पर बापू की प्रतिमा पर फूलों की माला डालकर सम्मान देने के लिए मिलते हैं। शहीदों को सम्मान देने के लिए सशस्त्र बलों के कर्मियों और अंतर-सेवा दल द्वारा भी सम्मानजनक सलामी दी जाती है।
दिन का इतिहास:
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को शाम की प्रार्थना के दौरान नाथूराम गोडसे द्वारा बिड़ला हाउस में हत्या कर दी गई थी। नाथूराम गोडसे गांधीजी को पकड़कर अपने अपराध को सही ठहराने की कोशिश कर रहे थे और कह रहे थे कि वे देश के विभाजन और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हजारों लोगों की हत्या के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने गांधीजी को एक ढोंग कहा और अपने अपराध के लिए किसी भी तरह से दोषी महसूस नहीं किया। 8 नवंबर को गोडसे को मौत की सजा सुनाई गई थी। तो इस दिन यानी 30 जनवरी को बापू ने अंतिम सांस ली और शहीद हो गए। भारत सरकार ने इस दिन को शहीद दिवस के रूप में घोषित किया।




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