
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपने 35वें स्थापना दिवस के मौके पर नया प्रतीक चिह्न जारी किया। इस दौरान सेबी के पूर्व चेयरमैन के साथ-साथ पूर्व और वर्तमान पूर्ण-कालिक सदस्य भी मौजूद थे। सेबी ने बयान में कहा कि नियामक संस्था ने उद्योगों के साथ साझेदारी और परामर्श की अपनी समृद्ध परंपरा में विश्वास जारी रखा है और उसका पालन करती रही है। सेबी को अप्रैल, 1988 में स्थापित किया गया था।
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बयान के अनुसार, आंकड़ा, प्रौद्योगिकी, परामर्श और साझेदारी के मिश्रण के साथ सेबी शेयर बाजार में सर्वश्रेष्ठ वैश्विक क्रियान्वयन स्थापित करने के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। सेबी की चेयरमैन माधवी पुरी बुच ने कहा कि सेबी का नया प्रतीक चिह्न उसकी समृद्ध परंपराओं और प्रतिभूति बाजार में इसकी जिम्मेदारी के सभी तीन क्षेत्रों- प्रतिभूति बाजार के विकास और विनियमन, निवेशक संरक्षण के लिए नए आंकड़े व प्रौद्योगिकी-आधारित दृष्टिकोण के अद्वितीय संयोजन को दिखाता है।
सेबी का नया लोगो
लोगो पारंपरिक नीले रंग के पैलेट को बरकरार रखता है लेकिन एक आधुनिक और समृद्ध भारत के लिए एक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है। अनावरण समारोह में सेबी के पूर्व और वर्तमान सदस्य उपस्थित थे।
सेबी के बारे में:
- सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) भारत में प्रतिभूति और वस्तु बाजार के लिए एक नियामक संस्था है।
- इसकी स्थापना 12 अप्रैल 1988 को हुई थी और इसका स्वामित्व वित्त मंत्रालय के पास है।
- 1992 में हर्षद मेहता घोटाले के बाद सेबी अधिनियम के साथ सेबी को अधिक शक्ति और अधिकार दिए गए थे।
- सेबी ने वर्षों से निवेशकों की सुरक्षा और बाजार के विकास को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया है।
- संगठन ने खुद को एक निवेशक-अनुकूल निकाय के रूप में पुनः ब्रांडेड किया है।
- सेबी ने भारत में प्रतिभूतियों और कमोडिटी बाजारों को आकार देने के लिए महत्वपूर्ण नियमों और विनियमों को लागू किया है।
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