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सेबी ने कमोडिटी डेरिवेटिव सेग्मेंट में स्टैगर्ड डिलीवरी पीरियड को घटा दिया

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सेबी ने कमोडिटी डेरिवेटिव सेग्मेंट में स्टैगर्ड डिलीवरी पीरियड को घटा दिया है। सेबी के द्वारा सर्कुलर के द्वारा ये जानकारी दी गई है। स्टैगर्ड डिलीवरी पीरियड को कम करने वाला सर्कुलर 24 मई को जारी हुआ है और पहली जुलाई 2024 से लागू होगा। सेबी के द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक सेबी ने अब स्टैगर्ड डिलीवरी पीरियड को 5 दिन से घटा कर 3 दिन कर दिया है। स्टैगर्ड डिलीवरी पीरियड किसी कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी से पहले के वो वक्त होता है जहां ओपन पोजीशन के साथ कोई खरीदार या विक्रेता डिलीवरी लेने या देने की अपनी इच्छा दर्ज करता है। ये समय अब घटकर 3 दिन कर दिया गया है।

साल 2019 में सेबी ने स्टैगर्ड डिलीवरी के लिए न्यूनतम समयसीमा तय की थी जब सेबी ने ये पाया था कि अलग अलग एक्सचेंज अलग अलग डिलीवरी शेड्यूल्स अपना रहे हैं। वहीं कमोडिइउयती’., टी डेरिवेटिव सेग्मेंट के लिए 4 अगस्त 2023 के मास्टर सर्कुलर में सेबी ने कहा था कि ओपन इंट्रेस्ट के रिकॉर्ड्स एक्सपायरी के वॉल्यूम आदि संकेतों को देखते हुए एक्सचेंज किसी कमोडिटी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट के लिए डिलीवरी पीरियड को बढ़ा सकते हैं। ये प्रावधान अभी भी लागू रहेगा।

इससे पहले भी सेबी ने कई बड़े फैसले लिए हैं।  इसमें से एक स्टॉक मार्केट में अफवाहों की वजह से स्टॉक पर होने वाले असर को खत्म करने से जुड़ा है। मार्केट के रेग्युलेटर सेबी ने इसे लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। नियमों के मुताबिक अगर किसी अपुष्ट खबर या अफवाह की वजह से स्टॉक में बड़ा अंतर देखने को मिलता है तो 24 घंटे के अंदर खबर की पुष्टि करनी होगी या उसे खारिज करना होगा या फिर कंपनी को अपनी स्थिति साफ करनी होगी।

 

FAQs

सेबी की स्थापना कब हुई?

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड का गठन भारत सरकार के एक प्रस्ताव के माध्यम से 12 अप्रैल, 1988 को एक गैर-वैधानिक निकाय के रूप में किया गया था।

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