SEBI ने Algo प्लेटफॉर्म ब्रोकर्स के लिए शुरू की सेटलमेंट स्कीम

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अनियमित एल्गोरिदम ट्रेडिंग (Algo Trading) प्लेटफॉर्म से जुड़े मामलों का निपटारा करने के लिए एक तीन महीने की सेटलमेंट योजना शुरू की है। यह योजना 16 जून से 16 सितंबर 2025 तक खुली रहेगी और इसका उद्देश्य है – ब्रोकर्स को लंबित मामलों का समाधान करने का अवसर देना, ताकि वे आगे की कानूनी कार्रवाई से बच सकें।

समाचार में क्यों?

10 जून 2025 को SEBI ने यह सेटलमेंट स्कीम उन स्टॉक ब्रोकर्स के लिए शुरू की, जिन पर अनधिकृत एल्गो प्लेटफॉर्म से जुड़ने के आरोप हैं। SEBI ने ज़ेरोधा, 5पैसा और मोटिलाल ओसवाल जैसे 100 से अधिक ब्रोकर्स को शोकॉज नोटिस जारी किए थे। अब इन ब्रोकर्स को कोर्ट, SAT (Securities Appellate Tribunal) या SEBI के सामने लंबित मामलों को निपटाने का मौका दिया गया है।

सेटलमेंट योजना का दायरा

  • आवेदन की समयसीमा: 16 जून से 16 सितंबर 2025

  • पात्रता: वे ब्रोकर्स जिनके खिलाफ SEBI, SAT या कोर्ट में एल्गो प्लेटफॉर्म से जुड़े मामले लंबित हैं।

  • सेटलमेंट राशि: प्रति ब्रोकर्स लगभग ₹1 लाख अनुमानित

  • सहायता: 16 जून को SEBI एक FAQ जारी करेगा जिससे ब्रोकर्स को प्रक्रिया समझने में मदद मिलेगी।

पृष्ठभूमि

SEBI की जांच में पाया गया कि कई ब्रोकर्स ने TradeTron जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से API (Application Programming Interface) का उपयोग कर ऑटोमैटिक ट्रेडिंग की सुविधा दी। इन प्लेटफॉर्म्स ने निश्चित मुनाफा देने वाली रणनीतियाँ पेश कीं, जो SEBI के नियमों का उल्लंघन है। इन रणनीतियों ने खुदरा निवेशकों को जोखिम भरे सौदों की ओर आकर्षित किया और पारदर्शिता तथा खुलासे के मानकों का उल्लंघन किया।

SEBI द्वारा नियमन में सख्ती

SEBI ने एल्गो ट्रेडिंग के लिए नए नियम लागू किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • एल्गो प्रदाताओं का पंजीकरण (Empanelment)

  • ब्रोकर्स और स्टॉक एक्सचेंजों की जवाबदेही

  • ऐसे प्लेटफॉर्म से ब्रोकर्स की स्पष्ट दूरी जो अवास्तविक मुनाफे का दावा करते हैं।

उद्देश्य और महत्त्व

  • निवेशक संरक्षण: अवैध एल्गो प्लेटफॉर्म से निवेशकों को बचाना।

  • बाजार की विश्वसनीयता: स्वचालित ट्रेडिंग में पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित करना।

  • एकमुश्त अवसर: ब्रोकर्स को न्यूनतम दंड के साथ पुराने उल्लंघनों को नियमित करने का अवसर देना।

यह पहल भारतीय पूंजी बाजार में जवाबदेही, पारदर्शिता और निवेशक विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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vikash

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