आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 ने भारत में महिला श्रम भागीदारी दर (FLFPR) में उल्लेखनीय वृद्धि को उजागर किया, जो विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की कार्यक्षमता में वृद्धि के कारण हुआ। यह वृद्धि देश के समग्र श्रम बाजार संकेतकों में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कारक मानी जा रही है। 31 जनवरी 2025 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत इस सर्वेक्षण में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में सरकार की विभिन्न योजनाओं और महिला उद्यमिता पहलों की भूमिका को प्रमुख रूप से दर्शाया गया।
महिला श्रम भागीदारी दर (FLFPR) में वृद्धि
ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी
सरकार की पहलें
ग्रामीण महिला उद्यमियों के सामने चुनौतियाँ
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS)
सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों के चलते महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में सुधार हो रहा है, लेकिन उन्हें उद्यमिता में आगे बढ़ाने के लिए और अधिक सहयोग की आवश्यकता बनी हुई है।
| वजह समाचार में? | महिला श्रम भागीदारी दर में वृद्धि, आर्थिक सर्वेक्षण द्वारा रिपोर्ट किया गया। |
| FLFPR वृद्धि (2017-18 से 2023-24) | 23.3% से बढ़कर 41.7%। |
| 30-40% FLFPR वाले राज्य | 21 राज्य। |
| 40% से अधिक FLFPR वाले राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | 7 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश (सिक्किम: 56.9%)। |
| ग्रामीण FLFPR वृद्धि | 24.6% (2017-18) से बढ़कर 47.6% (2023-24)। |
| सरकारी योजनाएं | दीनदयाल अंत्योदय योजना (DAY-NRLM), स्टार्टअप इंडिया पहल। |
| महिला स्टार्टअप्स में निदेशक | 73,151 स्टार्टअप्स (कुल स्टार्टअप्स का आधा)। |
| ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए मुख्य चुनौतियाँ | सीमित कौशल, बाजार तक पहुँच, तकनीकी अंतराल, मेंटॉरशिप की कमी। |
| PLFS 2023-24 के ध्यान केंद्रित क्षेत्र | बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश। |
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