कंबोडिया से पहली आधुनिक संघर्ष-संबंधित धरोहर, जो स्मृति संरक्षण और शांति शिक्षा को बढ़ावा देती है।
2. UNESCO अस्थायी सूची में प्रविष्टियाँ (2025)
वर्ष 2025 भारत और विश्व के लिए UNESCO मान्यताओं के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इस वर्ष UNESCO के विभिन्न कार्यक्रमों के अंतर्गत कई नई प्रविष्टियाँ जोड़ी गईं। ये प्रविष्टियाँ विश्व धरोहर स्थल, अस्थायी सूची, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत, मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर, क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क तथा वैश्विक जियोपार्क्स तक फैली हुई हैं। सामूहिक रूप से ये इस वैश्विक प्रवृत्ति को दर्शाती हैं कि अब केवल स्मारकों ही नहीं, बल्कि जीवंत परंपराओं, दस्तावेजी विरासत, भूवैज्ञानिक धरोहर और रचनात्मक शहरों को भी मान्यता दी जा रही है।
नए जोड़े गए प्राकृतिक स्थल
ये प्रविष्टियाँ भू-धरोहर, जलवायु इतिहास और पारिस्थितिक संरक्षण पर भारत के बढ़ते फोकस को दर्शाती हैं।
फिलहाल कोई वैश्विक जियोपार्क नहीं, लेकिन एर्रा मट्टी दिब्बालु और दक्कन ट्रैप्स जैसे स्थल भविष्य में प्रबल संभावनाएँ दर्शाते हैं।
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