भारत की न्यायपालिका में कई ऐसे कानूनी शब्द हैं जो आम लोगों के लिए जटिल लगते हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण शब्द है एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae). हाल ही में यह शब्द तब चर्चा में आया जब दिल्ली हाई कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान जज स्वर्ण कांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल से जुड़े मामले में एमिकस क्यूरी को लेकर अहम टिप्पणी की।
इस पोस्ट में जानें एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) क्या है?, इसकी भूमिका, अधिकार और हालिया उदाहरण
एमिकस क्यूरी एक लैटिन शब्द है, जिसका मतलब होता है – “न्यायमित्र”
यह वह व्यक्ति या वकील होता है जिसे कोर्ट किसी मामले में निष्पक्ष सलाह देने के लिए नियुक्त करती है।
हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान जज स्वर्ण कांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल से जुड़े मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त करने के निर्देश दिया है।
यह फैसला हाल ही में अरविंद केजरीवाल द्वारा जज स्वर्ण कांता शर्मा के कोर्ट का बहिष्कार करने के चलते लिया है. इस केस में अदालत ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी कानूनी पहलुओं पर निष्पक्ष और संतुलित विचार किया जाए, एमिकस क्यूरी की सहायता ली।
इससे यह साफ होता है कि बड़े और संवेदनशील मामलों में कोर्ट स्वतंत्र विशेषज्ञ की राय लेना जरूरी समझती है।
अधिकार:
जिम्मेदारियां:
एमिकस क्यूरी से जुड़े सवाल अक्सर UPSC, SSC, Banking और State Exams में पूछे जाते हैं। हालिया उदाहरणों के साथ इसे समझना आपके GK को और मजबूत बनाता है।
एमिकस क्यूरी न्यायपालिका का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो अदालत को निष्पक्ष और सटीक निर्णय लेने में मदद करता है।
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