मार्च 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.4% हो गई, जबकि फरवरी में यह 3.21% थी। ये आँकड़े राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी किए गए हैं। महंगाई में यह बढ़ोतरी मामूली है, लेकिन यह ज़रूरी खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों और बाहरी वैश्विक दबावों को दर्शाती है। ये नए आँकड़े 2024 को आधार वर्ष मानकर तैयार की गई नई CPI शृंखला पर आधारित हैं, और ये उपभोक्ता कीमतों के रुझानों के बारे में जानकारी देते हैं।
रिटेल महंगाई को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) का इस्तेमाल करके मापा जाता है, जो घरों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली चीज़ों और सेवाओं की कीमतों में होने वाले बदलावों पर नज़र रखता है।
मुख्य बातें
खुदरा मुद्रास्फीति में वृद्धि का मुख्य कारण खाद्य मुद्रास्फीति थी, जो फरवरी के 3.47% से बढ़कर मार्च में 3.87% हो गई।
कीमतों में वृद्धि के मुख्य कारक
इन वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि देखी गई है, और यह समग्र मुद्रास्फीति में वृद्धि में योगदान दे रही है।
वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रमों ने भी इसमें भूमिका निभाई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने इन पर प्रभाव डाला है:
महंगाई के आँकड़े नए CPI (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) सीरीज़ पर आधारित हैं, जिसका आधार वर्ष 2024 है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:
महंगाई दर में बढ़ोतरी के बावजूद यह अभी भी RBI के टॉलरेंस रेंज में है, जिसने 4% (+/- 2%) का टारगेट तय किया था।
इसका मतलब है कि महंगाई ठीक-ठाक और मैनेजेबल है और पॉलिसी में बड़े बदलावों के लिए तुरंत कोई दबाव नहीं है।
यह इकॉनमी में रिलेटिव प्राइस स्टेबिलिटी को भी दिखाता है।
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