INDIA - 2023/12/08: In this photo illustration, the Reserve Bank of India logo is seen displayed on a mobile phone screen. (Photo Illustration by Idrees Abbas/SOPA Images/LightRocket via Getty Images)
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में ₹2.5 लाख करोड़ की महत्वपूर्ण तरलता (लिक्विडिटी) डालने की घोषणा की है। यह पूंजी प्रवाह वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी के माध्यम से किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य वित्तीय प्रणाली में मौजूदा तरलता की कमी को दूर करना है, जिसे विभिन्न आर्थिक कारकों ने प्रभावित किया है। यह समर्थन बैंकिंग क्षेत्र को स्थिर बनाए रखने, ऋण प्रवाह को सुचारू रूप से जारी रखने और वित्तीय बाजारों में किसी भी बड़े व्यवधान को रोकने में मदद करेगा।
RBI का यह निर्णय बैंकिंग प्रणाली में बढ़ती तरलता की चिंता को दूर करने के लिए लिया गया है। तरलता की कमी के पीछे कई कारक हैं:
VRR तंत्र के माध्यम से की जा रही यह तरलता आपूर्ति बैंकों को उनकी बैलेंस शीट को स्वस्थ बनाए रखने और उद्योगों को ऋण देने में सहायता करेगी, जिससे आर्थिक विकास की गति बनी रहेगी।
RBI इस तरलता आपूर्ति को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए मुंबई में सभी कार्यदिवसों पर वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी आयोजित करेगा। इस प्रक्रिया की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
यह तरलता आपूर्ति RBI की हालिया मौद्रिक नीति के अनुरूप है। इसके तहत उठाए गए प्रमुख कदम हैं:
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वित्तीय वर्ष के अंत तक तरलता की कमी बनी रहती है, तो RBI ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) या विदेशी मुद्रा स्वैप (फॉरेक्स स्वैप) जैसे अतिरिक्त उपाय अपना सकता है।
| मुख्य पहलू | विवरण |
| क्यों चर्चा में? | RBI वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में ₹2.5 लाख करोड़ की तरलता डाल रहा है। यह कदम विदेशी मुद्रा बाजार हस्तक्षेप और राजकोषीय बहिर्वाह के कारण तरलता की कमी को दूर करने के लिए उठाया गया है। दैनिक VRR नीलामियां आयोजित की जाएंगी, जिनकी पुनर्भुगतान अवधि अगले कार्यदिवस पर होगी। |
| तरलता प्रवाह राशि | ₹2.5 लाख करोड़ |
| उपयोग की गई विधि | वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी |
| आवृत्ति | कार्यदिवसों पर दैनिक नीलामी |
| तरलता की कमी के कारण | विदेशी मुद्रा बाजार हस्तक्षेप, राजकोषीय बहिर्वाह और आर्थिक परिस्थितियाँ |
| रेपो दर में कटौती | 25 बेसिस पॉइंट (bps), अब 6.25% |
| RBI द्वारा बॉन्ड खरीद | ₹40,000 करोड़ तक बढ़ाई गई |
| भविष्य में अपेक्षित उपाय | ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO), विदेशी मुद्रा स्वैप (फॉरेक्स स्वैप) यदि तरलता और अधिक प्रभावित होती है |
| लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) क्रियान्वयन | 31 मार्च 2026 तक स्थगित |
| RBI गवर्नर | संजय मल्होत्रा |
| RBI मुख्यालय | मुंबई |
| RBI स्थापना | 1 अप्रैल 1935 |
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