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RBI ने 35 NBFC का लाइसेंस रद्द किया

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने जनवरी 2026 में नियामकीय मानकों का पालन न करने के कारण 35 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) का पंजीकरण प्रमाणपत्र (Certificate of Registration – CoR) रद्द कर दिया। ये रद्दीकरण 9 से 31 दिसंबर 2025 के बीच प्रभावी हुए। इसके अतिरिक्त, 16 अन्य NBFCs ने स्वेच्छा से अपना CoR RBI को वापस सौंप दिया, जिससे कुल 51 NBFCs का पंजीकरण निरस्त हो गया। यह सख्त नियामकीय कार्रवाई गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में अनुशासन, पारदर्शिता और वित्तीय प्रणाली की अखंडता बनाए रखने के प्रति RBI की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

यह कार्रवाई क्यों महत्वपूर्ण है?

RBI की यह सख्ती NBFC क्षेत्र में गंभीर अनुपालन विफलताओं को संबोधित करती है। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं—वित्तीय प्रणाली की स्थिरता बनाए रखना, उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना, नियामकीय प्रवर्तन को मजबूत करना, बाजार की विश्वसनीयता बढ़ाना तथा निवेशकों का भरोसा कायम रखना। गैर-अनुपालक संस्थाओं को हटाकर RBI जमाकर्ताओं, निवेशकों और पूरे वित्तीय तंत्र की सुरक्षा करता है। यह कदम नियामकीय उल्लंघनों के प्रति शून्य-सहिष्णुता नीति को स्पष्ट करता है।

कानूनी प्रावधान और RBI का अधिकार

RBI यह शक्ति RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA(6) के तहत प्रयोग करता है, जिसके अंतर्गत पंजीकरण शर्तों के उल्लंघन पर CoR रद्द किया जा सकता है। सभी NBFCs के लिए व्यवसाय शुरू करने से पहले पंजीकरण अनिवार्य है। न्यूनतम नेट ओन्ड फंड (NOF) की सीमा ₹10 करोड़ है (कुछ श्रेणियों में अधिक)। पंजीकरण रद्द होने के बाद संबंधित संस्थाएं NBFC/NBFI के रूप में कार्य नहीं कर सकतीं और उनका पंजीकरण स्वेच्छा से पुनः बहाल नहीं किया जा सकता।

भौगोलिक वितरण

RBI के अनुसार, रद्द की गई अधिकांश NBFCs दिल्ली/एनसीआर क्षेत्र में केंद्रित थीं, जो इस क्षेत्र में नियामकीय अनुपालन की गंभीर समस्याओं की ओर संकेत करता है। एनसीआर के बाहर केवल कुछ ही कंपनियाँ (जैसे मुंबई और जबलपुर) शामिल थीं।

16 NBFCs द्वारा स्वैच्छिक समर्पण

इनमें कुछ कंपनियाँ व्यवसाय से बाहर निकलने के कारण, कुछ कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) मानदंडों में पुनर्वर्गीकृत होने के कारण, तथा कुछ विलय, अमलगमेशन, विघटन या स्वैच्छिक स्ट्राइक-ऑफ के चलते बंद हुईं।

NBFCs को समझना

NBFCs, कंपनियों अधिनियम 1956/2013 के अंतर्गत पंजीकृत वित्तीय संस्थाएँ होती हैं, जो ऋण, अग्रिम, शेयर/प्रतिभूतियों में निवेश जैसी सेवाएँ देती हैं, लेकिन बैंकों की तुलना में उन पर कड़े प्रतिबंध होते हैं। ये मांग जमा स्वीकार नहीं कर सकतीं, भुगतान प्रणाली (PSS) का हिस्सा नहीं होतीं, इनके जमाकर्ताओं को DICGC बीमा नहीं मिलता और ये सीमित बैंकिंग सेवाएँ ही प्रदान कर सकती हैं। RBI की कड़ी निगरानी के अंतर्गत कार्य करते हुए, इस कार्रवाई ने NBFC क्षेत्र में अनुपालन और भरोसे को और मजबूत किया है।

NBFC की श्रेणियाँ (NBFC Categories)

श्रेणी उद्देश्य
निवेश एवं ऋण कंपनी (Investment & Credit Company – ICC) निवेश और ऋण प्रदान करने से जुड़ी सेवाएँ
आवास वित्त कंपनी (Housing Finance Company – HFC) आवास (होम लोन) से संबंधित विशेष ऋण
अवसंरचना वित्त कंपनी (Infrastructure Finance Company – IFC) अवसंरचना परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण
कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (Core Investment Company – CIC) अन्य कंपनियों में निवेश गतिविधियाँ
अवसंरचना ऋण कोष (IDF–NBFC) दीर्घकालिक अवसंरचना ऋण का वित्तपोषण

लायबिलिटी के प्रकार के अनुसार:

  • डिपॉजिट लेने वाली NBFCs – पब्लिक से डिपॉजिट लेती हैं (ज़्यादा रेगुलेटेड)
  • नॉन-डिपॉजिट लेने वाली NBFCs – डिपॉजिट नहीं लेती हैं (कम रेगुलेटेड)

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण बिंदु 

याद रखने योग्य तथ्य (Must Remember Facts):

  • RBI द्वारा CoR रद्द: जनवरी 2026 में 35 NBFCs का पंजीकरण (Certificate of Registration) रद्द
  • प्रभावी अवधि: 9 से 31 दिसंबर 2025
  • कानूनी अधिकार: RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA(6)
  • स्वैच्छिक समर्पण: 16 NBFCs ने स्वयं CoR लौटाया
  • कुल रद्द पंजीकरण: 51 NBFCs
  • भौगोलिक एकाग्रता: अधिकांश दिल्ली/एनसीआर क्षेत्र में
  • मुख्य कारण: नियामकीय अनुपालन में विफलता (Non-compliance)

मुख्य नियामकीय ढांचा 

  • NBFC पंजीकरण: RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA के अंतर्गत
  • न्यूनतम नेट ओन्ड फंड (NOF): ₹10 करोड़
  • RBI का अधिकार: CoR रद्द करने का पूर्ण एवं अंतिम अधिकार
  • रद्द होने के बाद: संबंधित संस्थाएँ NBFC/NBFI व्यवसाय नहीं कर सकतीं
  • रद्दीकरण का ट्रिगर: निरंतर नियमों का उल्लंघन / अनुपालन की कमी
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