प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) का 28 मार्च 2026 को उद्घाटन किया जाएगा, जिससे भारत के विमानन क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। यह परियोजना देश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट्स में से एक है और इसका पहला चरण (Phase I) शुरू किया जा रहा है। यह एयरपोर्ट इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा के साथ मिलकर एक ड्यूल-एयरपोर्ट सिस्टम बनाएगा, जिससे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते यात्री दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के जेवर (गौतम बुद्ध नगर) में स्थित है और यमुना एक्सप्रेसवे से उत्कृष्ट कनेक्टिविटी प्रदान करता है। दिल्ली और आसपास के प्रमुख शहरी केंद्रों के निकट होने के कारण यह उत्तर भारत के लिए एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बन गया है।
इस एयरपोर्ट का निर्माण लगभग ₹11,200 करोड़ के निवेश से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत किया जा रहा है। इस परियोजना का संचालन यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है, जो ज़्यूरिख़ एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की सहायक कंपनी है।
इस परियोजना की कंसेशन अवधि 40 वर्षों की है, जो 1 अक्टूबर 2021 से शुरू हुई। साथ ही, इसे नागर विमानन महानिदेशालय से एयरोड्रोम लाइसेंस भी मिल चुका है, जिससे यह सभी मौसमों में संचालन के लिए तैयार है।
पहले चरण में यह एयरपोर्ट प्रति वर्ष 1.2 करोड़ (12 मिलियन) यात्रियों को संभालने की क्षमता रखता है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 7 करोड़ (70 मिलियन) तक किया जा सकता है।
यह एयरपोर्ट ‘नेट-जीरो एमिशन’ मॉडल पर आधारित है, जिसमें ऊर्जा-कुशल तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसका डिजाइन भारतीय विरासत से प्रेरित है, जिसमें घाट और हवेली जैसी वास्तुकला के तत्व शामिल हैं, जो आधुनिकता और संस्कृति का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करते हैं।
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