प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शताब्दी उत्सव समारोह के अवसर पर एक विशेष स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया। यह कार्यक्रम संगठन के 100 वर्षों के सफर का सम्मान करता है, जिसे 1925 में नागपुर में केशव बलिराम हेडगेवार ने स्थापित किया था।
RSS: 100 वर्षों की यात्रा
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स्थापना: 1925, नागपुर, केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा
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प्रकृति: स्वयंसेवक-आधारित संगठन, जो अनुशासन, सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रीय सेवा पर केंद्रित है
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दृष्टि: धर्मपरायणता में निहित, भारत की सर्वांगिण उन्नति (संपूर्ण विकास) का लक्ष्य
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RSS को राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए जन-निहित आंदोलन के रूप में वर्णित किया गया है, जो शताब्दियों के विदेशी शासन के जवाब के रूप में उभरा।
RSS के योगदान
पिछले एक शताब्दी में, RSS और उसके संबद्ध संगठनों ने कई क्षेत्रों में योगदान दिया है:
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शिक्षा: विद्यालय और सांस्कृतिक केंद्रों की स्थापना
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स्वास्थ्य एवं कल्याण: सामाजिक सेवा और चिकित्सा पहल
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आपदा राहत: बाढ़, भूकंप और चक्रवात के समय पुनर्वास सहायता
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युवा, महिला और किसान सशक्तिकरण: सशक्तिकरण कार्यक्रम और जमीनी स्तर पर mobilisation
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सामुदायिक सुदृढ़ीकरण: स्थानीय भागीदारी और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा
शताब्दी उत्सव का महत्व
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देशभक्ति और अनुशासन को बढ़ावा देने में इसका ऐतिहासिक योगदान
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शिक्षा, सामाजिक कल्याण और समुदाय निर्माण में योगदान
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भारत की सांस्कृतिक और राजनीतिक यात्रा पर इसका स्थायी प्रभाव
यह समारोह न केवल RSS की अतीत की उपलब्धियों का सम्मान करता है, बल्कि एकता, सेवा और राष्ट्रीय गौरव के संदेश को भी पुनः पुष्टि करता है।


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