प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महत्वाकांक्षी कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (सीसीएस) परियोजना के तहत पहली इमारत, कर्तव्य भवन का उद्घाटन किया, जो सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना का एक प्रमुख तत्व है। यह कई मंत्रालयों और विभागों को एक एकल, आधुनिक और कुशल परिसर में समेकित करके केंद्र सरकार के कामकाज के तरीके को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
केंद्रीकृत शासन की ओर एक दृष्टिकोण
हाल ही में उद्घाटित कर्तव्य भवन – 03 में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, तथा भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय स्थापित किया जाएगा।
वर्तमान में कई मंत्रालय शास्त्री भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन और निर्माण भवन जैसी इमारतों से संचालित हो रहे हैं, जिन्हें 1950 से 1970 के दशक के बीच बनाया गया था। ये भवन अब संरचनात्मक रूप से पुराने और कार्यकुशलता की दृष्टि से अनुपयुक्त माने जा रहे हैं, जिससे आधुनिकीकरण की आवश्यकता और भी अधिक हो गई है।
बड़ा लक्ष्य: 10 नए केंद्रीय सचिवालय भवन
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत, केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा 10 कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) भवनों का निर्माण किया जा रहा है। इन भवनों में 50 से अधिक मंत्रालयों और विभागों को एक छत के नीचे लाया जाएगा, जिससे शासन व्यवस्था अधिक समन्वित और कुशल बनेगी।
CCS 2 और CCS 3 अगले माह तक पूर्ण होने की उम्मीद है, जबकि CCS 10 अप्रैल 2026 तक और CCS 6 एवं CCS 7 अक्टूबर 2026 तक तैयार होने की संभावना है।
निर्माण को सुगम बनाने के लिए अस्थायी स्थानांतरण
निर्माण कार्य में बाधा न आए, इसके लिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि चार प्रमुख भवनों से कार्यरत कई मंत्रालयों को अस्थायी रूप से कस्तूरबा गांधी मार्ग, मिंटो रोड और नेताजी पैलेस स्थित परिसरों में दो वर्षों के लिए स्थानांतरित किया जाएगा।
हालांकि, कुछ इमारतों को संरक्षित रखा जाएगा, जैसे—राष्ट्रीय संग्रहालय, राष्ट्रीय अभिलेखागार, जवाहरलाल नेहरू भवन (विदेश मंत्रालय), डॉ. आंबेडकर ऑडिटोरियम और वाणिज्य भवन, क्योंकि ये या तो हाल ही में निर्मित हैं या विरासत महत्व की हैं।
सिर्फ सचिवालय नहीं, सेंट्रल विस्टा की व्यापक योजना
सेंट्रल विस्टा परियोजना भारत के इतिहास की सबसे बड़ी अधोसंरचना परियोजनाओं में से एक है। इसमें कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट के अलावा शामिल हैं:
नया संसद भवन
उपराष्ट्रपति एन्क्लेव
विजय चौक से इंडिया गेट तक का पुनर्विकसित कर्तव्य पथ
एक कार्यकारी एन्क्लेव जिसमें नया प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय, इंडिया हाउस और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय शामिल होंगे
अगले चरण में नया प्रधानमंत्री आवास भी प्रस्तावित है
इस परियोजना का उद्देश्य आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ प्रशासनिक दक्षता को जोड़ना है, जिससे 21वीं सदी के भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप कार्यस्थल तैयार हो सके।
शासन का नया युग
एक ही परिसर में मंत्रालयों को एकत्रित कर, यह कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट प्रणाली अंतर्विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करेगी, दोहराव को कम करेगी और नागरिकों को सेवाएं देने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भविष्योन्मुख और दक्ष शासन मॉडल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
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