भारत–फ्रांस संबंधों को मजबूत करने और भारत के विमानन कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के कानपुर में एरोनॉटिक्स और रक्षा क्षेत्र में कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCoE) स्थापित करने की घोषणा की। यह घोषणा फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ संयुक्त प्रेस वक्तव्य के दौरान की गई, जब दोनों नेताओं ने भारत–फ्रांस नवाचार वर्ष का उद्घाटन किया। यह पहल उन्नत प्रौद्योगिकी, कौशल विकास और रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को रेखांकित करती है।
कानपुर में स्थापित किया जाने वाला एरोनॉटिक्स और रक्षा क्षेत्र का राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCoE) एक विश्व-स्तरीय कौशल विकास संस्थान के रूप में परिकल्पित है। इसका उद्देश्य उन्नत तकनीक और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करना है, ताकि भारत का विमानन और रक्षा क्षेत्र वैश्विक मानकों के साथ कदम मिला सके।
प्रमुख फोकस क्षेत्र
यह केंद्र निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करेगा:
इस पहल का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मानकों और उद्योग की मांग के अनुरूप वैश्विक स्तर पर सक्षम विमानन पेशेवरों की एक मजबूत श्रृंखला (pipeline) तैयार करना है।
यह केंद्र ₹60,000 करोड़ की बड़ी वित्तीय व्यवस्था वाली प्रमुख PM-SETU योजना के अंतर्गत स्थापित किया जाएगा। यह योजना भारत के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को आधुनिक और उद्योग-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
PM-SETU के उद्देश्य
PM-SETU का लक्ष्य है:
यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के व्यापक विज़न का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक विकास के लिए कुशल कार्यबल तैयार करना है।
कानपुर के अतिरिक्त, अन्य प्रस्तावित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र निम्न स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे:
प्रत्येक केंद्र क्षेत्रीय औद्योगिक विशेषताओं जैसे उन्नत विनिर्माण, उभरती प्रौद्योगिकियों और उच्च-विकास सेवा क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य करेगा।
राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCoE) की स्थापना भारत–फ्रांस सामरिक साझेदारी को और सशक्त बनाती है, जो पहले ही रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और अब व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्रों में उल्लेखनीय रूप से विस्तारित हो चुकी है।
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) तथा फ्रांसीसी गणराज्य की सरकार के बीच एक आशय पत्र (Letter of Intent – LoI) का आदान-प्रदान किया गया है। यह LoI वर्ष 2025 में कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद का कदम है।
इस साझेदारी के अंतर्गत निम्नलिखित पहलें प्रस्तावित हैं:
यह सहयोग सुनिश्चित करेगा कि भारतीय प्रशिक्षुओं को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं का अनुभव मिले, विशेष रूप से एरोनॉटिक्स और रक्षा विनिर्माण जैसे उच्च-परिशुद्धता क्षेत्रों में।
यह पहल भारत को वैश्विक कौशल मानचित्र पर एक मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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