भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है और अरुणाचल प्रदेश की कमला जलविद्युत परियोजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हाल ही में सार्वजनिक निवेश बोर्ड (Public Investment Board) द्वारा स्वीकृत यह बड़ी जलविद्युत परियोजना न केवल नवीकरणीय बिजली उत्पादन में सहायक होगी, बल्कि बाढ़ नियंत्रण, रोज़गार सृजन और भारत के 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्य को प्राप्त करने में भी योगदान देगी।
कमला जलविद्युत परियोजना, जिसे पहले सुबनसिरी मिडिल जलविद्युत परियोजना के नाम से जाना जाता था, अरुणाचल प्रदेश की कमला नदी पर स्थित है। यह परियोजना कामले, क्रा दादी और कुरुंग कुमे जिलों में विकसित की जा रही है।
यह एक भंडारण आधारित (स्टोरेज-बेस्ड) जलविद्युत योजना है, जिसमें बाढ़ शमन (Flood Moderation) की एकीकृत व्यवस्था भी शामिल है। परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 6,870 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होने की संभावना है, जिससे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड को मजबूती मिलेगी।
कमला जलविद्युत परियोजना में 216 मीटर ऊँचा कंक्रीट ग्रैविटी बाँध तथा एक भूमिगत पावरहाउस का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना को 96 महीनों (लगभग 8 वर्ष) में पूरा करने की योजना है। बिजली उत्पादन के साथ-साथ इसकी भंडारण प्रणाली नदी के प्रवाह को नियंत्रित करेगी और विशेष रूप से ब्रह्मपुत्र घाटी के निचले क्षेत्रों को मौसमी बाढ़ से सुरक्षा प्रदान करेगी, जहाँ हर वर्ष बाढ़ की गंभीर समस्या रहती है।
कमला परियोजना को बिल्ड-ओन-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। इसमें NHPC की 74% इक्विटी हिस्सेदारी होगी, जबकि अरुणाचल प्रदेश सरकार 26% हिस्सेदारी रखेगी। परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹26,070 करोड़ है, जिसमें 70:30 का ऋण-इक्विटी अनुपात अपनाया जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से ₹1,340 करोड़ अवसंरचना सहायता तथा ₹4,744 करोड़ बाढ़ शमन के लिए दिए जाएंगे। राज्य सरकार द्वारा GST की प्रतिपूर्ति की जाएगी। परियोजना की स्तरीकृत (लेवलाइज़्ड) टैरिफ ₹5.97 प्रति यूनिट अनुमानित है।
परियोजना के निर्माण चरण के दौरान लगभग 300 प्रत्यक्ष रोज़गार और 2,500 संविदा आधारित रोज़गार सृजित होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना दूरस्थ जिलों में आधारभूत संरचना के विकास, पूर्वोत्तर क्षेत्र में विद्युत ग्रिड की स्थिरता और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी।
परियोजना के पूर्ण होने के बाद कमला जलविद्युत परियोजना स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और बाढ़ प्रबंधन के माध्यम से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाएगी और भारत को 2070 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाएगी।
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