फिलीपींस ने 2025 में दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला कोरल लार्वा क्रायोबैंक (Coral Larvae Cryobank) शुरू किया, जिसका उद्देश्य कोरल की आनुवंशिक विविधता को संरक्षित करना और समुद्री रीफ पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा करना है। यह पहल उस समय की गई है जब वैश्विक कोरल आबादी जलवायु परिवर्तन, ब्लीचिंग और मानवीय गतिविधियों के कारण गंभीर खतरे में है।
यह पहल फिलीपींस, ताइवान, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड के वैज्ञानिक संस्थानों के बहुराष्ट्रीय सहयोग का हिस्सा है।
मुख्य उद्देश्य:
कोरल के लार्वा (Larvae) को फ्रीज और संग्रहित करना।
भविष्य में इन्हें रीफ में पुनर्स्थापन (Reintroduction) के लिए सुरक्षित रखना।
समुद्री जैव विविधता की सुरक्षा और रीफ बहाली (Coral Reef Restoration) में योगदान।
क्रायोप्रिज़र्वेशन: जीवित कोशिकाओं या ऊतकों को अत्यधिक निम्न तापमान (~–196°C) पर लिक्विड नाइट्रोजन में संरक्षित करना।
कोरल लार्वा के लिए:
लार्वा को क्रायोप्रोटेक्टेंट्स जैसे ग्लिसरॉल, एथिलीन ग्लाइकोल या DMSO के साथ तैयार किया जाता है।
विट्रीफिकेशन प्रक्रिया: कोशिकाओं के अंदर पानी को बदलकर तेजी से ठंडा किया जाता है, जिससे आइस क्रिस्टल का नुकसान नहीं होता।
संरक्षित लार्वा को अनिश्चितकाल तक संग्रहित किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर रीफ पुनर्स्थापन या शोध के लिए पुनर्जीवित किया जा सकता है।
यह क्षेत्र लगभग 6 मिलियन वर्ग किलोमीटर में फैला है और इसमें शामिल हैं:
इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीप और तिमोर-लेस्ते
विशेषताएँ:
दुनिया की 75% से अधिक कोरल प्रजातियाँ
वैश्विक रीफ मछली प्रजातियों का लगभग एक तिहाई
विस्तृत मैंग्रोव वन और
सात में से छह समुद्री कछुआ प्रजातियाँ
यह क्षेत्र वैश्विक समुद्री जैव विविधता, क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा, और तटीय अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
वैश्विक स्तर पर कोरल रीफ संकट में हैं।
Status of Coral Reefs of the World 2020 रिपोर्ट के अनुसार, 2009–2018 में 14% कोरल खो गए।
मुख्य कारण:
जलवायु परिवर्तन और कोरल ब्लीचिंग
समुद्र के बढ़ते तापमान
प्रदूषण और विनाशकारी मछली पकड़ना
अनियंत्रित तटीय विकास और पर्यटन
कोरल: समुद्री अस्थि विहीन जीव (Marine Invertebrates) जो बड़े कॉलोनियों (Polyps) में रहते हैं।
ये कैल्शियम कार्बोनेट का उत्सर्जन कर कठोर ढांचा (Exoskeleton) बनाते हैं।
कोरल रीफ समुद्री जीवन का 25% हिस्सा हैं और प्रजनन, भोजन और आश्रय प्रदान करते हैं।
फ्रिंजिंग रीफ्स (Fringing Reefs): तटीय क्षेत्रों के पास
बैरीयर रीफ्स (Barrier Reefs): तट से दूर, लैगून से अलग
एटोल्स (Atolls): डूबे ज्वालामुखी द्वीपों के चारों ओर वृत्ताकार
उच्च तापमान या प्रदूषण से कोरल सिम्बायोटिक शैवाल (Zooxanthellae) को बाहर निकाल देते हैं।
इससे कोरल सफेद दिखते हैं और यदि परिस्थितियाँ बेहतर न हों, तो मृत्यु हो सकती है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| देश | फिलीपींस |
| लॉन्च वर्ष | 2025 |
| तकनीक | क्रायोप्रिज़र्वेशन (विट्रीफिकेशन) |
| क्रायोबैंक उद्देश्य | कोरल लार्वा और आनुवंशिक विविधता संरक्षित करना |
| तापमान | लगभग –196°C (लिक्विड नाइट्रोजन में) |
| कोरल त्रिभुज क्षेत्र | इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, PNG, सोलोमन द्वीप, तिमोर-लेस्ते |
| वैश्विक कोरल हानि (2009–2018) | 14% |
बजट FY27 में वित्तीय अनुशासन का संदेश देने के बावजूद बांड बाजार में दबाव के…
हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में आयोजित अभ्यास अग्नि परीक्षा ने खास ध्यान आकर्षित किया…
पंजाब के विमानन मानचित्र में 02 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक बदलाव देखने…
भारत की जैव विविधता को एक बार फिर नई पहचान मिली है, जब वैज्ञानिकों ने…
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने नेतृत्व स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है।…
भारत ने औपचारिक रूप से भविष्य के युद्धों के लिए अपने सैन्य नेतृत्व को तैयार…