अभिजीत शेठ राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के नए अध्यक्ष बने

केंद्र सरकार ने डॉ. अभिजीत शेठ को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति उस समय हुई है जब आयोग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते जांच चल रही है। डॉ. अभिजीत शेठ इससे पहले नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज़ (NBEMS) के अध्यक्ष थे, जो NEET-PG जैसी प्रमुख मेडिकल परीक्षाएं आयोजित करता है।

परिवर्तन की आवश्यकता क्यों पड़ी?

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग भारत में चिकित्सा शिक्षा की निगरानी करने वाली सर्वोच्च संस्था है। यह सुनिश्चित करता है कि डॉक्टरों की ट्रेनिंग और मेडिकल कॉलेजों का संचालन निष्पक्ष और गुणवत्ता-पूर्ण हो। अक्टूबर 2024 में तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. बी. एन. गंगाधर ने इस्तीफा दे दिया था, लेकिन नियुक्तियों की कमी के कारण उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया और वे पद पर बने रहे। कई महीनों तक नए अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो सकी, जबकि मंत्रिमंडलीय नियुक्ति समिति को कई बार सूची भेजी गई।

अंततः जुलाई 2025 में सरकार ने डॉ. अभिजीत शेठ को एनएमसी प्रमुख नियुक्त किया। फिलहाल वे कुछ महीनों तक NBEMS के अध्यक्ष बने रहेंगे, क्योंकि अगस्त 2025 में NEET-PG परीक्षा आयोजित की जानी है। परीक्षा के बाद वे पूरी तरह NMC की जिम्मेदारी संभालेंगे।

भ्रष्टाचार के मामले ने बढ़ाई चिंता

हाल ही में सीबीआई ने एनएमसी में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। इसमें मेडिकल कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट लीक करने, फर्जी स्टाफ और मरीजों के उपयोग, और निजी कॉलेजों को लाभ पहुंचाने के लिए रिश्वत लेने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इस एफआईआर में डॉ. गंगाधर का नाम नहीं है, लेकिन इसमें 34 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें शामिल हैं:

  • पूर्व यूजीसी अध्यक्ष डॉ. डी. पी. सिंह

  • स्वास्थ्य मंत्रालय और एनएमसी के अधिकारी

  • निरीक्षण टीम के सदस्य

  • कई निजी मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधि

इस मामले ने देश में मेडिकल कॉलेजों की मान्यता और निरीक्षण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नई जिम्मेदारी, नई उम्मीदें

अब डॉ.अभिजीत शेठ पर दोहरी जिम्मेदारी है—NEET-PG परीक्षा का सफल संचालन और भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रहे NMC को पारदर्शी और प्रभावी संस्था बनाना। चिकित्सा शिक्षा में सुधार और निरीक्षण प्रक्रिया को विश्वसनीय बनाने की दिशा में यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने राज्यसभा के लिए चार सदस्यों को नामित किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत मंत्रिपरिषद की सलाह पर चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को राज्यसभा (संसद के उच्च सदन) में नामित किया है। यह कदम क़ानून, शिक्षा, कूटनीति और सामाजिक सेवा जैसे विविध क्षेत्रों से विशेषज्ञता को संसद में प्रतिनिधित्व देने की दिशा में उठाया गया है।

कौन हैं नए राज्यसभा सदस्य?

नामित किए गए चार सदस्य हैं:

  • उज्ज्वल निकम – एक प्रसिद्ध वकील, जो कई हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों में अपनी भूमिका के लिए जाने जाते हैं।

  • सी. सदानंदन मास्टर – एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता, जिन्होंने युवाओं के सशक्तिकरण और समाजसेवा के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किया है।

  • हर्षवर्धन श्रृंगला – वरिष्ठ राजनयिक और भारत के पूर्व विदेश सचिव, जिन्होंने भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • डॉ. मीनाक्षी जैन – एक सम्मानित इतिहासकार और शिक्षाविद, जो शिक्षा, राजनीति शास्त्र और साहित्य के क्षेत्र में विशेष ज्ञान रखती हैं।

इन नियुक्तियों से सेवानिवृत्त नामित सदस्यों की जगह को भरा गया है और राज्यसभा में नए दृष्टिकोण और अनुभव लाने की उम्मीद है।

संविधान क्या कहता है?

ये नामांकन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80(1)(a) के अंतर्गत किए गए हैं, जो राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वे कला, साहित्य, विज्ञान और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाले अधिकतम 12 व्यक्तियों को राज्यसभा में नामित कर सकें।

इन नामांकनों का उद्देश्य संसद में विशेषज्ञता और विविध विचारों को शामिल करना है, जिससे बहसें अधिक सारगर्भित हों और विधायी प्रक्रिया अधिक प्रभावशाली बने।

भारत ने सऊदी फर्म मादेन के साथ 5 साल का डीएपी उर्वरक समझौता किया

भारत और सऊदी अरब ने उर्वरकों की आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण दीर्घकालिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा की 11 से 13 जुलाई 2025 तक दम्माम और रियाद में हुई तीन दिवसीय यात्रा के दौरान हुए। इस पहल का उद्देश्य भारत की उर्वरक आवश्यकताओं को सुरक्षित करना और स्वास्थ्य व औषधि क्षेत्रों में सहयोग को मज़बूत बनाना है।

उर्वरक व्यापार को नई दिशा

रसायन और उर्वरक मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल सऊदी अरब गया। वहां सऊदी अरब के उद्योग और खनिज संसाधन मंत्री बंदर बिन इब्राहीम अल खुरायफ के साथ मिलकर उन्होंने माडेन (Ma’aden) कंपनी और भारतीय कंपनियों – आईपीएल, कृभको और सीआईएल – के बीच दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों का निरीक्षण किया।

इस नए समझौते के तहत भारत को 2025–26 से शुरू होकर प्रति वर्ष 31 लाख मीट्रिक टन डायअमोनियम फॉस्फेट (DAP) उर्वरक मिलेगा, जो पाँच वर्षों तक लागू रहेगा। आपसी सहमति से इसे पाँच वर्षों के लिए और बढ़ाया जा सकता है। यह 2024–25 में आयात किए गए 19 लाख मीट्रिक टन की तुलना में बड़ी वृद्धि है।

उर्वरक सुरक्षा और निवेश को बढ़ावा

दोनों देशों ने DAP के अलावा यूरिया और अन्य प्रमुख उर्वरकों के क्षेत्र में सहयोग को विस्तार देने पर सहमति जताई। आपसी निवेश को लेकर भी बातचीत हुई, जिसमें भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने सऊदी उर्वरक उद्योग में निवेश में रुचि दिखाई। बदले में, सऊदी कंपनियां भी भारत में निवेश के अवसर तलाशेंगी।

भारत-केंद्रित अनुकूलित उर्वरकों पर अनुसंधान के लिए एक संयुक्त कार्यदल गठित किया गया है, ताकि कृषि उत्पादकता और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिल सके।

स्वास्थ्य और औषधि क्षेत्र में सहयोग

यात्रा के दौरान नड्डा ने सऊदी अरब के उपस्वास्थ्य मंत्री अब्दुलअज़ीज अल-रुमैह से मुलाकात की। इसमें चिकित्सा सेवाओं, डिजिटल स्वास्थ्य, औषधि उत्पादन और ज्ञान साझाकरण में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल की सऊदी यात्रा में हुए स्वास्थ्य समझौते (MoU) की भी सराहना की गई।

इसके अलावा नड्डा ने सऊदी ऊर्जा मंत्री और रणनीतिक साझेदारी परिषद के सह-अध्यक्ष प्रिंस अब्दुलअज़ीज बिन सलमान अल सऊद से भी भेंट की और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की।

औद्योगिक भ्रमण और भविष्य की दिशा

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने रास अल खैर स्थित माडेन के फॉस्फेट संयंत्र का दौरा भी किया, जहां उनका स्वागत माडेन फॉस्फेट के चेयरमैन हसन अल अली ने किया। माडेन भारत को उर्वरकों की आपूर्ति करने वाली एक प्रमुख कंपनी है, और यह दौरा दोनों देशों के औद्योगिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में अहम रहा।

ये समझौते भारत के किसानों के लिए स्थिर उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे और खाद्य सुरक्षा के दीर्घकालिक लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेंगे। साथ ही, स्वास्थ्य और औषधि जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर भी खुलेंगे।

संयुक्त सैन्य अभ्यास से भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा संबंध और मजबूत हुए

भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास एक्सरसाइज़ टैलिस्मन सेबर में भाग लिया है, जो भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग में एक ऐतिहासिक क्षण है। यह सैन्य अभ्यास 13 जुलाई 2025 को आधिकारिक रूप से शुरू हुआ, जिसमें अमेरिका सहित 19 देशों की सेनाएं हिस्सा ले रही हैं। इस भागीदारी से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की सुरक्षा भूमिका और अधिक मज़बूत हुई है।

भारत की ऐतिहासिक भागीदारी
ऑस्ट्रेलिया में आयोजित इस उच्च स्तरीय युद्धाभ्यास में भारत की पहली भागीदारी को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और सैन्य कदम माना जा रहा है। इस बात की जानकारी ऑस्ट्रेलिया के भारत में उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर साझा की। यह अभ्यास भारत की बढ़ती वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा भागीदारी को दर्शाता है।

टैलिस्मन सेबर 2025 के बारे में
एक्सरसाइज़ टैलिस्मन सेबर 2025 इस अभ्यास का 11वां संस्करण है और अब तक ऑस्ट्रेलिया में हुआ सबसे बड़ा सैन्य युद्धाभ्यास है। इसमें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, भारत समेत 19 देशों के 35,000 से अधिक सैनिक भाग ले रहे हैं। यह अभ्यास क्वींसलैंड, नॉर्दर्न टेरिटरी, न्यू साउथ वेल्स, वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया और क्रिसमस द्वीप तक फैला है। इस बार पहली बार पापुआ न्यू गिनी में भी युद्धाभ्यास आयोजित किया जा रहा है।

उद्घाटन समारोह HMAS Adelaide युद्धपोत पर हुआ, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के वाइस एडमिरल जस्टिन जोन्स और अमेरिका के लेफ्टिनेंट जनरल जोएल बी. वॉवेल ने गार्डन आइलैंड, सिडनी में नेतृत्व किया।

अभ्यास के उद्देश्य और गतिविधियाँ
इस अभ्यास में लाइव फायर ड्रिल, फील्ड ट्रेनिंग, समुद्री और वायु अभियान, उभयचर लैंडिंग और संयुक्त सैन्य रणनीति जैसे युद्ध कौशल शामिल हैं। साथ ही, इसमें ऑस्ट्रेलिया के नए रक्षा उपकरणों जैसे UH-60M ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और प्रिसीजन स्ट्राइक मिसाइल का प्रदर्शन भी किया जाएगा।

भाग लेने वाले अन्य देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, ब्रिटेन, फिलीपींस आदि शामिल हैं, जबकि मलेशिया और वियतनाम पर्यवेक्षक देशों के रूप में उपस्थित हैं। इस बहुपक्षीय सहयोग का उद्देश्य संयुक्त रक्षा तैयारियों को मज़बूत करना, रणनीतिक ज्ञान साझा करना और क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देना है।

इगा स्वियाटेक ने जीता विंबलडन का खिताब

पोलैंड की इगा स्वियाटेक ने 12 जुलाई 2025 को अपने करियर का पहला विंबलडन खिताब जीत लिया। उन्होंने फाइनल में अमेरिका की अमांडा अनीसिमोवा को सिर्फ 57 मिनट में 6-0, 6-0 से हरा दिया। यह मुकाबला टेनिस इतिहास के सबसे एकतरफा महिला फाइनल्स में से एक बन गया। “डबल बैगेल” स्कोरलाइन (दोनों सेट में 6-0) के साथ यह जीत इतिहास में दर्ज हो गई और इगा स्वियाटेक के करियर में एक और ग्रैंड स्लैम खिताब जुड़ गया।

स्वियातेक की शानदार विजय

24 वर्षीय इगा स्वियाटेक ने ऑल इंग्लैंड क्लब के सेंटर कोर्ट पर पूरी तरह से दबदबा बनाया और अनीसिमोवा को अपने खेल में ढलने का कोई मौका नहीं दिया। इगा स्वियाटेक ने कुल 79 में से 55 अंक जीते, जबकि केवल 10 विनर लगाए। अनीसिमोवा की 28 अनफोर्स्ड एरर्स ने उनके लिए हालात और मुश्किल बना दिए। ग्रैंड स्लैम इतिहास में यह सिर्फ तीसरी बार हुआ है जब महिला फाइनल 6-0, 6-0 से समाप्त हुआ, और ऐसा पिछली बार 1988 में हुआ था।

इस जीत से इगा स्वियाटेक को अपना छठा ग्रैंड स्लैम खिताब मिला, और पहली बार घास (grass court) पर ट्रॉफी उठाई। वह अब एकमात्र सक्रिय महिला खिलाड़ी हैं जिनके पास क्ले, हार्ड और ग्रास—तीनों सतहों पर मेजर खिताब हैं। यह उनकी ग्रैंड स्लैम में 100वीं जीत भी थी, जिसे उन्होंने सिर्फ 120 मैचों में हासिल किया—इतिहास के सबसे तेज़ रिकॉर्ड में से एक।

अनीसिमोवा का कठिन दिन

23 वर्षीय अमांडा अनीसिमोवा ने अपने पहले ग्रैंड स्लैम फाइनल तक पहुंचने के दौरान शानदार प्रदर्शन किया था, जिसमें उन्होंने सेमीफाइनल में वर्ल्ड नंबर 1 आर्यना सबालेंका को हराया। लेकिन फाइनल में वह इगा स्वियाटेक की तेज़ी और रणनीति का सामना नहीं कर सकीं और कई गलतियां कर बैठीं। मैच के बाद वह बेंच पर बैठकर रोती नज़र आईं, जबकि इगा स्वियाटेक ने अपनी टीम के साथ जश्न मनाया।

अनीसिमोवा ने दो साल पहले मानसिक स्वास्थ्य के कारण टेनिस से ब्रेक लिया था और हाल ही में दृढ़ संकल्प के साथ वापसी की। पिछले साल तो वह विंबलडन के लिए क्वालिफाई भी नहीं कर पाई थीं, लेकिन इस बार फाइनल में पहुंचने के कारण अब वह पहली बार डब्ल्यूटीए टॉप 10 में जगह बनाएंगी।

इगा स्वियाटेक की वापसी की कहानी

इगा स्वियाटेक ने जून 2024 के फ्रेंच ओपन के बाद कोई खिताब नहीं जीता था और उनकी फॉर्म में गिरावट आई थी। इस वजह से विंबलडन में उन्हें आठवीं वरीयता मिली। 2024 में उन्हें एक महीने का डोपिंग बैन भी झेलना पड़ा था, जो बाद में एक चिकित्सीय पदार्थ के आकस्मिक संपर्क के रूप में स्पष्ट हुआ। इन सभी बाधाओं के बावजूद उन्होंने कोच की रणनीतियों पर भरोसा करते हुए घास पर अपना खेल निखारा और धमाकेदार वापसी की।

जीत के बाद उन्होंने कहा, “मैंने तो इसका सपना भी नहीं देखा था, मेरी टीम ने मुझ पर मुझसे ज़्यादा विश्वास किया।” इस ऐतिहासिक क्षण के दौरान शाही बॉक्स में मौजूद कैथरीन, प्रिंसेस ऑफ वेल्स ने पुरस्कार समारोह में भाग लिया।

जानिक सिनर ने कार्लोस अल्‍कराज को हराकर जीता विंबलडन खिताब

विश्व नंबर एक जानिक सिनर ने ऑल इंग्लैंड क्लब पर इतिहास रचते हुए पहली बार विंबलडन ट्रॉफी अपने नाम की। सिनर ने ग्रासकोर्ट पर लगातार दो वर्ष से खिताब जीतने वाले स्पेन के कार्लोस अल्‍कराज को तीन घंटे चले फाइनल मुकाबले में 4-6, 6-4, 6-4, 6-4 से हराकर खिताब जीता। सिनर विंबडलन खिताब जीतने वाले इटली के पहले खिलाड़ी बने। इसके साथ ही सिनर ने पिछले महीने फ्रेंच ओपन के फाइनल में अल्‍कराज से मिली हार का भी हिसाब चुकता कर लिया। यह सिनर के करियर का चौथा ग्रैंड स्लैम खिताब है।

सिनर की विंबलडन में बड़ी जीत

23 वर्षीय इटली के जानिक सिनर ने स्पेन के 22 वर्षीय कार्लोस अल्‍कराज को सेंटर कोर्ट, ऑल इंग्लैंड क्लब में खेले गए मुकाबले में चार सेटों में 4-6, 6-4, 6-4, 6-4 से हराया। इस जीत के साथ अल्‍कराज की 24 मैचों की अपराजेय लय और विंबलडन में 20 मैचों की जीत की श्रृंखला का अंत हो गया।

सिनर ने पूरे मैच में जबरदस्त एकाग्रता और ऊर्जा दिखाई, खासकर तब जब दबाव बहुत ज़्यादा था। चौथे सेट में, जब वह अपनी सर्विस पर 15-40 से पिछड़ रहे थे, तब उन्होंने दो ब्रेक प्वाइंट बचाए और अंत में मैच जीत लिया। जीतने के बाद वह घास पर झुककर खुशी से झूम उठे और ज़मीन पर मुक्के मारकर अपनी खुशी जताई।

एक यादगार प्रतिद्वंद्विता

यह विंबलडन फाइनल जून 2025 के फ्रेंच ओपन फाइनल का रीमैच था, जहां अल्‍कराज ने सिनर को पांच सेटों के रोमांचक मुकाबले में हराया था। उस हार से सिनर बेहद आहत हुए थे, लेकिन विंबलडन में उनकी वापसी ने उनके मानसिक मजबूती का प्रमाण दिया। अब इन दोनों खिलाड़ियों ने पिछले सात ग्रैंड स्लैम खिताबों में से चार-चार आपस में बांटे हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि ये दोनों आज के पुरुष टेनिस के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी हैं।

आखिरी बार जब एक ही साल में फ्रेंच ओपन और विंबलडन के फाइनल में एक ही जोड़ी पहुंची थी, वह 2006, 2007 और 2008 में राफेल नडाल और रोजर फेडरर के बीच हुआ था।

सिनर का शानदार सीज़न

सिनर लगातार चार ग्रैंड स्लैम फाइनल में खेल चुके हैं—यूएस ओपन (सितंबर 2024), ऑस्ट्रेलियन ओपन (जनवरी 2025) और अब विंबलडन 2025 जीतकर उन्होंने अपनी ताकत और निरंतरता साबित की है। सेमीफाइनल में उन्होंने दिग्गज नोवाक जोकोविच को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने अपनी दाहिनी कोहनी में चोट के बावजूद बाजू पर सुरक्षा पट्टी बांधकर खेला और कभी दर्द जाहिर नहीं किया। उन्होंने दिखा दिया कि वह अब टेनिस जगत के सबसे भरोसेमंद और शक्तिशाली खिलाड़ियों में से एक हैं।

वर्षा देशपांडे ने 2025 का संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या पुरस्कार जीता

महाराष्ट्र के सतारा की अधिवक्ता वरषा देशपांडे को 2025 का संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या पुरस्कार प्रदान किया गया है। यह सम्मान उन्हें लिंग समानता को बढ़ावा देने और लिंग-चयनात्मक गर्भपात को रोकने के लिए किए गए आजीवन कार्यों के लिए दिया गया। यह पुरस्कार विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई 2025) को न्यूयॉर्क में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया गया।

बेटी बचाने को समर्पित जीवन

वरषा देशपांडे, दलित महिला विकास मंडल की सचिव हैं, जिसे उन्होंने 1990 में स्थापित किया था। पिछले तीन दशकों से वे लिंग आधारित भ्रूण हत्या के खिलाफ संघर्ष कर रही हैं और विशेष रूप से हाशिये पर मौजूद महिलाओं और लड़कियों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही हैं।

वे अवैध लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या से जुड़ी गतिविधियों को उजागर करने के लिए स्टिंग ऑपरेशन के लिए जानी जाती हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारत में PCPNDT कानून (पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम) के प्रभावी क्रियान्वयन में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। उनका कार्यक्षेत्र बाल विवाह की रोकथाम, कानूनी सुधार, और महिलाओं की आर्थिक स्वावलंबन योजनाओं तक फैला हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र की सराहना और आयोजन की मुख्य बातें

पुरस्कार प्राप्त करते हुए, वरषा देशपांडे ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनका व्यक्तिगत नहीं, बल्कि उन सभी लोगों का है जो सामाजिक न्याय और महिला अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने उन्हें लिंग, जाति और धर्म के आधार पर होने वाले भेदभाव जैसे गहरे मुद्दों को संबोधित करने के लिए सराहा। UNFPA इंडिया की प्रतिनिधि एंड्रिया एम. वोजनर ने कहा कि देशपांडे के प्रयासों ने प्रजनन अधिकारों और महिलाओं व लड़कियों की गरिमा को स्थायी रूप से मजबूत किया है।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या पुरस्कार के बारे में

यह पुरस्कार 1981 में स्थापित किया गया था और पहली बार 1983 में प्रदान किया गया। हर साल यह पुरस्कार उन व्यक्तियों या संगठनों को दिया जाता है जिन्होंने जनसंख्या और प्रजनन स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो। विजेता को एक स्वर्ण पदक, प्रशस्ति पत्र, और नकद पुरस्कार दिया जाता है। इस वर्ष वरषा देशपांडे को व्यक्तिगत श्रेणी में यह सम्मान प्राप्त हुआ है। इस पुरस्कार का प्रमुख उद्देश्य ऐसे जमीनी कार्यकर्ताओं के प्रयासों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है, जो समाज में वास्तविक परिवर्तन लाने के लिए कार्यरत हैं।

हरेला पर्व पर उत्तराखंड में 5 लाख से अधिक पौधे लगाये जाएंगे

उत्तराखंड सरकार 16 जुलाई 2025 को हरेला पर्व के अवसर पर 5 लाख से अधिक पौधे लगाने की तैयारी कर रही है, जो पर्यावरण संरक्षण को लेकर राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह विशाल वृक्षारोपण अभियान न केवल एक नया रिकॉर्ड स्थापित करने का लक्ष्य रखता है, बल्कि आमजन में हरियाली और जलवायु संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी एक प्रयास है।

राज्यव्यापी वृक्षारोपण अभियान

इस अभियान के तहत गढ़वाल क्षेत्र में 3 लाख और कुमाऊं क्षेत्र में 2 लाख पौधे लगाए जाएंगे। पौधारोपण सार्वजनिक पार्कों, नदियों के किनारों, जंगलों, विद्यालयों, सरकारी परिसरों और आवासीय क्षेत्रों में किया जाएगा। इस वर्ष हरेला पर्व की थीम “एक पेड़ माँ के नाम” और “हरेला का त्योहार मनाओ, धरती माँ का ऋण चुकाओ” रखी गई है।

जनभागीदारी को बढ़ावा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार, सभी विभागों और सामाजिक संगठनों को इस अभियान में भागीदारी के लिए सक्रिय किया जा रहा है। ग्रामीण, स्कूल के छात्र, सरकारी अधिकारी, पर्यावरण कार्यकर्ता और स्वयंसेवी संस्थाएं इस अभियान में भाग लेंगी। यह सहभागिता लोगों को दैनिक जीवन में हरियाली अपनाने और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने की दिशा में मदद करेगी।

रिकॉर्ड तोड़ने का लक्ष्य

इस वर्ष का वृक्षारोपण अभियान जुलाई 2016 में बनाए गए रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की तैयारी में है, जब एक दिन में 2 लाख पौधे लगाए गए थे। इस बार 5 लाख से अधिक पौधे लगाकर न सिर्फ नया रिकॉर्ड बनाने की योजना है, बल्कि यह एक सशक्त संदेश भी है कि उत्तराखंड जलवायु कार्रवाई और सतत जीवनशैली को गंभीरता से ले रहा है।

जिंजी किला यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित

तमिलनाडु के विलुप्पुरम जिले में स्थित जिंजी किला (Gingee Fort) को पेरिस में आयोजित यूनेस्को की 47वीं वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी की बैठक में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है। यह किला मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स का हिस्सा है, जिसमें 12 किलों को उनके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए वैश्विक मान्यता मिली है।

जिंजी किले को मिला वैश्विक सम्मान

जिंजी किला, जिसे अक्सर “पूरब का ट्रॉय” कहा जाता है, दक्षिण भारत के सबसे पुराने और अद्वितीय किलों में से एक है। यह तमिलनाडु से इस वर्ष यूनेस्को विश्व धरोहर टैग की दौड़ में शामिल एकमात्र स्थल था। अब इस मान्यता के साथ, जिंजी किले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण और प्रचार के लिए सहायता मिलेगी और यह घरेलू व विदेशी पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन सकता है।

यूनेस्को की बैठक में लिया गया निर्णय

यह घोषणा फ्रांस के पेरिस में चल रही यूनेस्को की बैठक के दौरान की गई। मराठा सैन्य परिदृश्य (Maratha Military Landscapes) को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाना भारत की ऐतिहासिक वास्तुकला और सैन्य विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। तमिलनाडु और पूरे भारत के लिए इसे गौरवपूर्ण क्षण बताया गया है।

किले का इतिहास और महत्व

9वीं शताब्दी में बना जिंजी किला चोल, विजयनगर साम्राज्य, मराठा, मुगल और ब्रिटिश शासकों के अधीन रहा है। इसकी पहाड़ी पर स्थित संरचना और मजबूत किलेबंदी इसे दक्षिण भारत की सैन्य शक्ति का प्रतीक बनाती है। कल्याण महल, जो एक मीनार जैसी इमारत है, इस किले का प्रमुख आकर्षण है और अक्सर पर्यटन प्रचार में दिखाया जाता है। यह किला न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक विरासत के रूप में भी तमिलनाडु की शान का प्रतीक है।

इटली और नीदरलैंड ने ICC T20 World Cup 2026 के लिए क्वालीफाई किया

भारत और श्रीलंका द्वारा सह-आयोजित आईसीसी पुरुष T20 विश्व कप 2026 के लिए इटली और नीदरलैंड्स ने यूरोप क्वालिफायर्स के अंतिम दिन अपने स्थान पक्के किए। जहां नीदरलैंड्स ने अपना मुकाबला जीतकर क्वालिफाई किया, वहीं नेट रन रेट के आधार पर इटली ने पहली बार इस टूर्नामेंट में जगह बनाई।

रोमांचक रहा आखिरी दिन

यूरोप क्वालिफायर्स के आखिरी दिन चारों टीमें क्वालिफिकेशन की दौड़ में थीं। स्कॉटलैंड के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बावजूद जर्सी टीम क्वालिफाई नहीं कर सकी। अंततः इटली और नीदरलैंड्स ने दो उपलब्ध स्थान हासिल किए।

नीदरलैंड्स के खिलाफ मुकाबले में इटली ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 20 ओवर में 134/7 का स्कोर बनाया। नीदरलैंड्स ने यह लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया, लेकिन इटली ने मैच को 17वें ओवर तक खींच कर अपना नेट रन रेट बचा लिया और इस आधार पर पहली बार T20 वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई कर लिया।

प्रमुख खिलाड़ी और मैच के खास पल

इटली की ओर से बेंजामिन मानेन्टी ने संयमित पारी खेली, जबकि ग्रांट स्टीवर्ट ने अंतिम ओवरों में अहम रन जोड़े। गेंदबाज़ी में नीदरलैंड्स के रूलोफ वान डर मर्वे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 ओवर में 15 रन देकर 3 विकेट लिए। काइल क्लेन ने भी इटली की रनगति पर अंकुश लगाने में मदद की।

दूसरी पारी में माइकल लेविट और मैक्स ओ’डॉड ने पावरप्ले में नीदरलैंड्स को तेज शुरुआत दिलाई। भले ही बाद में गति कुछ धीमी हुई, टीम ने जीत हासिल कर ली और इटली ने भी अपने लक्ष्य को पूरा कर लिया।

आगे क्या होगा

अब तक 15 टीमें ICC T20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्वालिफाई कर चुकी हैं। एशिया-EAP क्वालिफायर से तीन और टीमें जुड़ेंगी, जबकि अफ्रीका क्वालिफायर से दो और टीमों का चयन होगा। इस तरह कुल 20 टीमें इस मेगा टूर्नामेंट में भाग लेंगी।

भारत और श्रीलंका द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित T20 विश्व कप 2026 अब तक के सबसे बड़े संस्करणों में से एक माना जा रहा है। इस बार टूर्नामेंट में कई नई टीमों की भागीदारी देखने को मिलेगी, जिनमें इटली जैसी टीम पहली बार वैश्विक मंच पर पदार्पण करेगी। इस तरह की नई टीमों की उपस्थिति से प्रतियोगिता न केवल और रोमांचक बनेगी, बल्कि क्रिकेट के वैश्विक विस्तार को भी बढ़ावा मिलेगा। टूर्नामेंट में विविधता और प्रतिस्पर्धा का नया स्तर देखने को मिलेगा, जिससे यह संस्करण ऐतिहासिक बन सकता है।

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