चीन में शुरू हुआ ‘रोबोटों का ओलंपिक’, 16 देशों की 280 टीमें ले रहीं हिस्सा

बीजिंग में आयोजित वर्ल्ड ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स ने भविष्य की रोबोटिक्स की झलक पेश की, जहाँ 16 देशों के 500 से अधिक ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने हिस्सा लिया। चार दिन तक चले इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन ने खेल, नृत्य और वास्तविक कार्यों में रोबोट्स की क्षमता को परखते हुए तकनीकी कौशल, शक्ति और सीमाओं का मिश्रण प्रस्तुत किया।

बुद्धिमान मशीनों का अखाड़ा

ह्यूमनॉइड रोबोट, जिन्हें मानव जैसी संरचना और गति के लिए डिज़ाइन किया गया है, 26 अलग-अलग प्रतिस्पर्धी इवेंट्स में आमने-सामने आए। इन इवेंट्स में पारंपरिक खेल प्रारूपों के साथ-साथ भविष्यवादी रोबोटिक कौशल और समस्या-समाधान की क्षमता का भी प्रदर्शन हुआ।

मुख्य प्रतियोगिताएं

  • 100 मीटर दौड़ – सबसे तेज़ रोबोट ने 21.5 सेकंड में दौड़ पूरी की।

  • फुटबॉल – पूरी तरह स्वायत्त रोबोट्स ने समन्वित खेल की कोशिश की।

  • किकबॉक्सिंग – संतुलन और झटके के बाद रिकवरी की क्षमता दिखाई।

  • नृत्य और रिले रेस – टीमवर्क, समन्वय और गतिशीलता की परीक्षा।

इन इवेंट्स का उद्देश्य रोबोट्स के सेंसर, AI निर्णय क्षमता, मोटर कंट्रोल और अनुकूलनशीलता की सीमाओं को परखना था।

मुख्य आकर्षण और चुनौतियाँ

प्रतियोगिता में फुर्ती और गति के शानदार प्रदर्शन देखने को मिले, लेकिन कई मौकों पर रोबोट्स की मौजूदा तकनीकी सीमाएँ भी उजागर हुईं।

उल्लेखनीय क्षण

  • 100 मीटर दौड़ में 21.5 सेकंड का समय—मानव जैसी गति प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव।

  • किकबॉक्सिंग में कुछ रोबोट्स ने टकराव के बाद खुद को संतुलित कर लिया—वास्तविक अनुप्रयोगों के लिए अहम क्षमता।

  • फुटबॉल मैचों में कई रोबोट्स गिर पड़े या टकरा गए, जिससे पता चला कि पूरी तरह स्वायत्त नेविगेशन में अभी बड़ी चुनौतियाँ हैं।

  • 400 मीटर रिले दौड़ में एक रोबोट के गिरते ही बाकी का संतुलन भी बिगड़ गया, जिससे प्रोग्रामिंग और वास्तविक समय सेंसरिंग की सीमाएँ स्पष्ट हुईं।

विशेषज्ञों ने माना कि इंसानों के विपरीत रोबोट्स में व्यक्तिगत रिकवरी मैकेनिज़्म नहीं है, जिसके कारण एक की गलती कई के लिए विफलता बन जाती है।

वैश्विक भागीदारी और नवाचार प्रवृत्तियाँ

जापान, चीन, दक्षिण कोरिया और जर्मनी जैसे अग्रणी देशों सहित 16 देशों के रोबोट्स ने इसमें हिस्सा लिया। हर टीम ने अपनी अनूठी तकनीकी दृष्टि और डिज़ाइन के साथ योगदान दिया, जिसमें शामिल थे—

  • गतिशीलता (Locomotion) इंजीनियरिंग

  • AI ट्रेनिंग मॉडल

  • सेंसर कैलिब्रेशन

  • स्वायत्त निर्णय लेने की तकनीक

यह आयोजन रोबोटिक्स जगत के लिए एक साझा मंच बना, जहाँ विचारों का आदान-प्रदान हुआ, नए प्रोटोटाइप परखे गए और वैश्विक स्तर पर प्रगति का मूल्यांकन किया गया।

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vikash

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