Home   »   नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन बिल

नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन बिल

नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन बिल_3.1

क्या है? एनआरसी

  • नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन बिल (NRC Bill)  एक रजिस्टर है जिसमें भारत में रह रहे सभी वैध नागरिकों का रिकॉर्ड रखा जाएगा। 
  • 1985 में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने असम गण परिषद से समझौता किया जिसके तहत 25 मार्च 1971 के पहले जो बांग्लादेशी असम में आए हैं केवल उन्हें ही नागरिकता दी जाएगी। लेकिन लंबे वक्त तक इसे ठंडे बस्ते में रखा गया। फिर 2005 में सरकार ने इस पर काम शुरू किया। 2015 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस काम में तेज़ी आई और एनआरसी को तैयार किया गया। यानी मूल रूप से एनआरसी को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से असम के लिए लागू किया गया है। फिलहाल यह असम के अलावा किसी अन्य राज्य में लागू नहीं है।
क्यों हैं चर्चा में
  • अगस्त 2019 में एनआरसी की सूची प्रकाशित की गई, लेकिन क़रीब 19 लाख लोगों के पास उचित दस्तावेज़ नहीं पाए जाने की वजह से उन्हें प्रकाशित रजिस्टर से बाहर रखा गया। इस सूची से बाहर लोगो को वैध प्रमाण पत्र के साथ अपनी नागरिकता साबित करने के लिए वक्त दिया गया।
  • अगले संसद सत्र में इसे पूरे देश में लागू करने का बिल लाया जा सकता है। पूरे भारत में लागू करने के लिए इसके लिए अलग जरूरतें और मसौदा होगा।
एनआरसी के लिए किन दस्तावेजों की होगी जरूरत
  • भारत का वैध नागरिक साबित होने के लिए एक व्यक्ति के पास रिफ्यूजी रजिस्ट्रेशन, आधार कार्ड, जन्म का सर्टिफिकेट, एलआईसी पॉलिसी, सिटिजनशिप सर्टिफिकेट, पासपोर्ट, सरकार के द्वारा जारी किया लाइसेंस या सर्टिफिकेट में से कोई एक होना चाहिए।
एनआरसी सूची में नहीं होने वाले लोगों का क्या होगा?
  • अगर कोई व्यक्ति एनआरसी में शामिल नहीं होता है तो उसे डिटेंशन सेंटर में ले जाया जाएगा जैसा कि असम में किया गया है। इसके बाद सरकार उन देशों से संपर्क करेगी जहां के वो नागरिक हैं। अगर सरकार द्वारा उपलब्ध कराए साक्ष्यों को दूसरे देशों की सरकार मान लेती है तो ऐसे अवैध प्रवासियों को वापस उनके देश भेज दिया जाएगा।
                                                      Find More National News Here

TOPICS:

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *