भारत की GDP ग्रोथ 2025-26 में 6.2% रह सकती है: नोमुरा

जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए भारत की GDP वृद्धि दर को घटाकर 6.2% कर दिया है, जो कि FY25 के 6.5% और FY24 के तेज़ 9.2% की वृद्धि दर से कम है। यह अनुमान 3 जून 2025 को जारी किया गया, जो यह संकेत देता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में धीमी गति देखी जा सकती है।

समाचार में क्यों?
यह संशोधित अनुमान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए 6.5% की अनुमानित वृद्धि दर से मेल नहीं खाता।
नोमुरा का अधिक सतर्क दृष्टिकोण ऐसे समय में आया है जब भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेतक मिश्रित दिखाई दे रहे हैं —
कुछ क्षेत्रों में मजबूती (जैसे GST संग्रह), जबकि
अन्य क्षेत्रों में कमजोरी (जैसे ऑटोमोबाइल बिक्री और बैंक ऋण वृद्धि)।

साथ ही, वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताएं भारत की आर्थिक गति और निजी निवेश चक्र को प्रभावित कर सकती हैं।

प्रमुख अनुमान और आर्थिक संकेतक

  • वित्त वर्ष 2023–24 (FY24) GDP वृद्धि: 9.2% (COVID के बाद तेज़ पुनरुद्धार)

  • वित्त वर्ष 2024–25 (FY25) GDP वृद्धि: 6.5% (सरकारी आधिकारिक आँकड़े)

  • वित्त वर्ष 2025–26 (FY26) के लिए नोमुरा का अनुमान: 6.2%

  • FY26 के लिए RBI का अनुमान: 6.5% (FY25 जैसा ही, कोई परिवर्तन नहीं)

  • नोमुरा का दृष्टिकोण: यह गिरावट मामूली है, लेकिन यह एक धीमी आर्थिक प्रगति की ओर संकेत करती है, जो संभवतः वैश्विक कारकों और असमान घरेलू पुनरुद्धार के कारण है।

नीचे की ओर अनुमान के कारण

  • आर्थिक संकेतकों में असमानता

    • सकारात्मक पक्ष: GST संग्रह मजबूत बना हुआ है।

    • कमजोर पक्ष: ऑटोमोबाइल बिक्री धीमी, बैंक ऋण वृद्धि सुस्त।

  • वैश्विक अनिश्चितताएं और निजी निवेश चक्र में देरी

  • उपभोक्ता मांग और औद्योगिक उत्पादन में असमान पुनरुद्धार

इक्विटी बाजार पर प्रभाव

  • GDP अनुमान में कटौती के बावजूद, नोमुरा ने मार्च 2026 के लिए निफ्टी 50 का लक्ष्य 24,970 से बढ़ाकर 26,140 कर दिया।

  • इसके कारण:

    • ब्याज दरों में कमी

    • घरेलू निवेश प्रवाह में स्थिरता

    • भारत की अपेक्षाकृत कम-वोलैटिलिटी (लो-बेटा) इक्विटी प्रोफाइल

    • लाभ अनुमान में कटौती के बावजूद निवेशकों का आत्मविश्वास

क्षेत्रीय दृष्टिकोण

  • घरेलू-केंद्रित क्षेत्रों (जैसे, इन्फ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय सेवाएं) पर अधिक निवेश (ओवरवेट)।

  • निर्यातकों के प्रति सतर्कता, क्योंकि वैश्विक जोखिम बने हुए हैं।

विरोधाभासी दृष्टिकोण

  • BofA Securities: चेतावनी दी कि अल्पकाल में भारतीय इक्विटी मूल्यांकन “पूर्ण” (overvalued) दिखते हैं।

  • दीर्घकालिक दृष्टिकोण: फिर भी सकारात्मक बना हुआ है, मुख्य रूप से इन कारणों से:

    • अवसंरचना (Infrastructure) का विकास

    • डिजिटलीकरण (Digitisation)

    • वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion)

    • संरचनात्मक उत्पादकता में वृद्धि (Structural Productivity Gains)

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vikash

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