बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब दिल्ली जा रहे हैं। नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा का नामांकन भर दिया। खुद जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने घोषणा की कि वह राज्यसभा चुनाव लड़ेंगे। इसके साथ ही सबसे लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल का अंत हो जाएगा। इस घोषणा के बाद राज्य में यह चर्चा तेज हो गई है कि उनके पद छोड़ने के बाद बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। संयोग देखिए कि नीतीश कुमार ने अपने मुख्यमंत्री सफर की शुरुआत भी मार्च (2000) में की थी और अब पद छोड़ने का बड़ा फैसला भी इसी महीने में लिया है।
नीतीश कुमार ने 16 मार्च 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने से पहले अपने राज्यसभा चुनाव लड़ने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उनकी उस लंबे समय से चली आ रही इच्छा को पूरा करता है, जिसमें वे देश की चारों प्रमुख विधायी संस्थाओं में सेवा देना चाहते थे।
इन चार संस्थाओं में शामिल हैं –
- लोकसभा
- राज्यसभा
- बिहार विधानसभा
- बिहार विधान परिषद
नितीश कुमार के राज्यसभा चुनाव लड़ने के निर्णय का अर्थ है कि वे बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे, हालांकि संभावना है कि चुनाव तक वे अपने पद पर बने रहेंगे।
उन्होंने बिहार की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों से उन्हें जो विश्वास और राजनीतिक समर्थन मिला है, उसके लिए वे राज्य के लोगों के प्रति कृतज्ञ हैं।
बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव
नितीश कुमार का राज्यसभा चुनाव लड़ने का निर्णय बिहार की राजनीति में एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है। नितीश कुमार अब तक 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जिससे वे राज्य के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल हो गए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने यह निर्णय अपने दसवें कार्यकाल की शपथ लेने के केवल चार महीने बाद लिया है। उनके इस ऐलान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।
राज्यसभा जाने पर नितीश कुमार का संदेश
राज्यसभा चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए नितीश कुमार ने बिहार की जनता को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि लोगों के विश्वास और समर्थन के कारण ही राज्य ने विकास के कई नए मील के पत्थर हासिल किए हैं।
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि राज्यसभा में जाने के बाद भी उनका बिहार से संबंध मजबूत बना रहेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य में बनने वाली बिहार सरकार को उनका पूरा समर्थन और मार्गदर्शन मिलता रहेगा।
चारों विधायी संस्थाओं में सेवा देने का रिकॉर्ड
नितीश कुमार का राज्यसभा चुनाव लड़ना उनके राजनीतिक जीवन की एक दुर्लभ उपलब्धि को पूरा करेगा। वे पहले ही तीन प्रमुख विधायी संस्थाओं में सेवा दे चुके हैं, जैसे—
- लोकसभा (संसद का निचला सदन)
- बिहार विधानसभा
- बिहार विधान परिषद
हालांकि अब तक वे कभी राज्यसभा के सदस्य नहीं रहे। यदि वे चुने जाते हैं, तो वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने चारों विधायी संस्थाओं में सेवा दी है, जिनमें लालू प्रसाद यादव और दिवंगत सुशील कुमार मोदी भी शामिल हैं।
नितीश कुमार का राजनीतिक सफर
- नितीश कुमार भारत के सबसे अनुभवी क्षेत्रीय नेताओं में से एक माने जाते हैं। उन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- नितीश कुमार को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान सबसे पहले सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में मिली। इसके बाद वर्ष 2005 में वे पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। तब से लेकर अब तक वे कई कार्यकालों तक इस पद पर रहे हैं।
- मुख्यमंत्री के रूप में उनका नाम विशेष रूप से सुशासन, बुनियादी ढाँचे के विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं से जुड़ा रहा है। उनके नेतृत्व में बिहार में सड़कों, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए।
- अब उनका राज्यसभा में संभावित प्रवेश उनके लंबे और प्रभावशाली राजनीतिक सफर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।


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