नीति आयोग ने ‘भारत की डेटा अनिवार्यता’ रिपोर्ट जारी की

भारत में डिजिटल गवर्नेंस प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नीति आयोग ने अपनी नवीनतम “फ्यूचर फ्रंट” रिपोर्ट का तीसरा संस्करण जारी किया है, जिसका शीर्षक है “इंडिया’ज़ डेटा इम्पेरेटिव: द पिवट टुवर्ड्स क्वालिटी” (India’s Data Imperative: The Pivot Towards Quality)। यह रिपोर्ट 26 जून 2025 को नई दिल्ली में जारी की गई और इसमें सार्वजनिक विश्वास, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, और प्रभावी सेवा वितरण के लिए उच्च गुणवत्ता वाले डेटा की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है।

क्यों है यह खबर में?

  • 26 जून 2025 को नीति आयोग ने Future Front श्रृंखला की तीसरी रिपोर्ट जारी की।

  • यह रिपोर्ट भारत में डेटा गुणवत्ता की चुनौतियों को उजागर करती है और बेहतर डेटा इकोसिस्टम की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

  • रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब डिजिटल गवर्नेंस सार्वजनिक सेवा और निर्णय लेने की प्रक्रिया का मुख्य आधार बनता जा रहा है।

मुख्य उद्देश्य

  • सार्वजनिक व्यवस्था में कमजोर डेटा गुणवत्ता की चुनौतियों को उजागर करना।

  • डेटा अखंडता (data integrity) बढ़ाने के लिए व्यावहारिक समाधानों और उपकरणों को प्रस्तुत करना।

  • डेटा गुणवत्ता, नागरिक विश्वास और सुशासन के बीच संबंध को मज़बूत करना।

रिपोर्ट की मुख्य विषयवस्तु

विषय विवरण
डेटा गैप्स और विखंडन पुराने और बिखरे हुए डेटा के कारण होने वाली अक्षमताओं की पहचान
सेवा वितरण पर प्रभाव असंगत डेटा के कारण सार्वजनिक सेवाओं और नीतियों के लक्षित क्रियान्वयन में बाधा
डेटा संस्कृति की आवश्यकता डेटा को “पब्लिक गुड” मानते हुए “डेटा-प्रथम” दृष्टिकोण को अपनाने का आह्वान
प्रैक्टिशनर्स टूलकिट डेटा सत्यापन और विश्लेषण के लिए आसान डिजिटल टूल्स की शुरुआत
  • बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम (सीईओ, नीति आयोग): डेटा संग्रहण और प्रबंधन प्रणाली में समग्र सुधार की आवश्यकता जताई।

  • डॉ. सौरभ गर्ग (सचिव, MoSPI): डेटा की interoperability और standardization पर बल दिया।

  • देबजानी घोष (डिस्टिंग्विश्ड फेलो, नीति आयोग): सेक्टर-वार डेटा विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए तकनीक का अधिकतम उपयोग करने की वकालत की।

व्यापक प्रभाव

  • यह रिपोर्ट केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों को डेटा-संचालित नीतियां बनाने में मार्गदर्शन देगी।

  • यह डिजिटल इंडिया पहल और डेटा फॉर डेवलपमेंट जैसे वैश्विक प्रयासों को मज़बूती प्रदान करेगी।

यह रिपोर्ट न केवल भारत में डेटा प्रबंधन की वर्तमान स्थिति पर रोशनी डालती है, बल्कि एक विश्वसनीय, पारदर्शी और डिजिटल रूप से सशक्त शासन प्रणाली की दिशा में मार्गदर्शक दस्तावेज़ के रूप में कार्य करेगी।

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vikash

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