प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के नौ वर्ष पूरे

जून 2016 में शुरू किया गया प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है। निःशुल्क, गुणवत्तापूर्ण और सुनिश्चित प्रसवपूर्व देखभाल (ANC) सेवाएँ प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया PMSMA महिलाओं को उनकी दूसरी और तीसरी तिमाही पर ध्यान केंद्रित करता है और पूरे देश में हर महीने की 9 तारीख को आयोजित किया जाता है। जून 2025 तक, इस कार्यक्रम के अंतर्गत 6.19 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं की जांच की जा चुकी है, जो एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य उपलब्धि है।

अभियान का उद्देश्य:

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव और नवजात शिशु की रक्षा सुनिश्चित करना है। यह अभियान हर महीने की 9 तारीख को देशभर में आयोजित होता है और इसका केंद्रबिंदु दूसरी और तीसरी तिमाही की गर्भवती महिलाएं होती हैं।

अब तक की प्रगति (जून 2025 तक):

  • जाँच की गई महिलाएं: 6.19 करोड़+

  • पंजीकृत स्वयंसेवी विशेषज्ञ: 6,813

  • सुविधाएँ जहाँ PMSMA लागू है: 20,752

मुख्य उद्देश्य:

  • मातृ मृत्यु दर (MMR) और नवजात मृत्यु दर में कमी लाना

  • High-Risk Pregnancies (HRPs) की समय रहते पहचान और इलाज

  • सुरक्षित प्रसव के लिए परामर्श, जांच और रेफरल सेवाएं प्रदान करना

सार्वजनिक-निजी सहभागिता मॉडल:

इस योजना की खासियत है कि इसमें निजी डॉक्टरों और विशेषज्ञों को स्वेच्छा से जोड़ा गया है। ये विशेषज्ञ:

  • सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में ANC जांच करते हैं

  • जागरूकता अभियान में योगदान देते हैं

  • PMSMA दिवसों पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाते हैं

मातृ मृत्यु दर में कमी:

  • 2014–16: 130 प्रति एक लाख जीवित जन्म

  • 2021–23: 80 प्रति एक लाख जीवित जन्म
    50 अंकों की गिरावट — मातृ स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार का संकेत

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के RMNCAH+N लक्ष्यों से संबद्ध:

PMSMA का उद्देश्य है:

  • हर गर्भवती महिला को कम से कम एक बार विशेषज्ञ से जांच दिलवाना

  • उच्च जोखिम गर्भावस्था (HRP) की देखभाल में सुधार

  • पोषण एवं प्रसव पूर्व तैयारी को बढ़ावा देना

  • किशोर गर्भावस्था एवं कुपोषण से निपटना

PMSMA की प्रमुख विशेषताएं:

  • निश्चित तिथि: हर महीने की 9 तारीख

  • विशेषज्ञों की स्वैच्छिक भागीदारी

  • नि:शुल्क जांच, परामर्श और पोषण सहायता

  • High-Risk Pregnancies की पहचान पर विशेष ध्यान

  • जन-निजी सहयोग से व्यापक पहुंच

उच्च जोखिम गर्भावस्था पर विशेष ध्यान

शुरुआत: जनवरी 2022
उद्देश्य: HRP महिलाओं का प्रसव और 45 दिन बाद तक व्यक्तिगत ट्रैकिंग
लाभ: HRP महिलाओं और उनकी ASHA कार्यकर्ता को प्रोत्साहन राशि

प्रमुख आँकड़े (31 दिसंबर 2024 तक):

  • पहचानी गई HRP महिलाएं: 78.27 लाख+

विशेषताएं:

  • नाम आधारित HRP सूची

  • HRP देखभाल हेतु महीने में 4 तक सत्र

  • SMS रिमाइंडर और फॉलोअप की निगरानी

  • 45 दिन तक पोस्टनैटल ट्रैकिंग

PMSMA के अंतर्गत दी जाने वाली सेवाएं:

  • व्यापक प्रसव पूर्व जांच (ANC)

  • रक्त, मूत्र, रक्तचाप जांच

  • पोषण परामर्श और पूरक आहार

  • टेटनस टीकाकरण

  • जटिलताओं के लिए विशेषज्ञ रेफरल

  • प्रसव पूर्व तैयारी योजना

अन्य मातृ एवं बाल स्वास्थ्य योजनाओं के साथ एकीकरण:

  1. जननी सुरक्षा योजना (JSY):

    • संस्थागत प्रसव को बढ़ावा

    • 11.07 करोड़ महिलाएं लाभान्वित (मार्च 2025 तक)

  2. जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK):

    • मुफ्त संस्थागत प्रसव और नवजात देखभाल

    • 16.60 करोड़ लाभार्थी (2014–15 से अब तक)

  3. LaQshya:

    • प्रसव कक्षों और मातृ ICU की गुणवत्ता में सुधार

  4. सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (SUMAN):

    • गरिमापूर्ण और सम्मानजनक मातृत्व देखभाल

    • 90,015 SUMAN सुविधाएं सक्रिय (मार्च 2025 तक)

  5. POSHAN अभियान:

    • कुपोषण को लक्षित करता है

    • 6.97 करोड़ “पोषण पखवाड़े” आयोजित

  6. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY):

    • ₹5,000 नकद सहायता — गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए

    • मातृत्व स्वास्थ्य और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा

 

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vikash

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