Home   »   भारत-नेपाल हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पूरा होने...

भारत-नेपाल हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पूरा होने के करीब

भारत-नेपाल हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पूरा होने के करीब_3.1

भारत की सहायता से बन रही 900 मेगावाट की अरुण-3 जलविद्युत परियोजना की मुख्य सुरंग में सफलता मिली है। नेपाल के प्रधानमंत्री श्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने नेपाल के संखुवासभा जिले में 900 मेगावाट अरुण-3 जलविद्युत परियोजना की 11.8 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल के लिए उत्खनन के पूरा होने के उपलक्ष्य में अंतिम विस्फोट कर सुरंग का उद्घाटन किया।

अरुण-3 जलविद्युत परियोजना का निर्माण एसजेवीएन अरुण-3 पावर डेवलपमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (एसएपीडीसी) द्वारा किया जा रहा है, जो एसजेवीएन की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। एसएपीडीसी एसजेवीएन और नेपाल सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण सहयोग है, जिसका उद्देश्य अरुण नदी बेसिन में सतत जलविद्युत उत्पादन के माध्यम से क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

अरुण-3 जल विद्युत परियोजना के बारे में

  • अरुण-3 जल विद्युत परियोजना (Hydro Electric Project-HEP) पूर्वी नेपाल के सनखुवासभा ज़िले में अरुण नदी पर है।
  • इस परियोजना के अंतर्गत 70 मीटर ऊँचा गुरुत्‍व बांध (concrete gravity dam) और भूमिगत पावर हाउस के साथ 11.74 किलोमीटर की हेड रेस सुरंग (Head Race Tunnel-HRT) नदी के बाएँ किनारे पर बनाई जाएगी तथा 4 इकाइयों में से प्रत्‍येक इकाइ 225 मेगावाट विद्युत उत्‍पादन करेंगी।
  • SJVN लिमिटेड ने यह परियोजना अंतर्राष्ट्रीय स्पर्द्धी बोली के माध्यम से प्राप्‍त की है। नेपाल सरकार और SJVN लिमिटेड ने परियोजना के लिये मार्च 2008 में समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किये थे।
  • यह समझौता ज्ञापन 30 वर्ष की अवधि के लिये बिल्‍ड ओन ऑपरेट तथा ट्रांसफर (Build Own Operate and Transfer-BOOT) के आधार पर किया गया था। 30 वर्ष की अवधि में 5 वर्ष की निर्माण अवधि भी शामिल है।

आधिकारिक रिपोर्ट

नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सफलता ने नेपाल और भारत को स्वच्छ, नवीकरणीय ऊर्जा प्रदान करने और क्षेत्र के सतत विकास में योगदान देने के अपने लक्ष्य के करीब ला दिया है। नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने पिछले साल नेपाल से बिजली के आयात के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेपाली समकक्ष के बीच हुई दीर्घकालिक बिजली व्यापार पर सहमति को याद किया। निर्यातोन्मुखी 900 मेगावाट अरुण-3 का पूरा होना समझौते के लिए एक प्रमुख मील का पत्थर होगा।

FAQs

भारत की सबसे पहली जल विद्युत परियोजना कौन सी है?

भारत मे पहला जल विद्युत शक्ति गृह 1897 में दार्जिलिंग,पश्चिम बंगाल के सिद्रापोग मे स्थापित किया गया था। इसकी क्षमता 130 मेगावाट थी।