राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) ने नेशनल क्लाइमेट स्टैक इनोवेशन चैलेंज की शुरुआत की है, जो भारत की जलवायु लचीलापन (Climate Resilience) प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक राष्ट्रीय पहल है। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए तैयार की गई है। इस चैलेंज को बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और डालबर्ग एडवाइजर्स के सहयोग से शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीकी समाधान विकसित करना है जो जलवायु संबंधी डेटा को एकीकृत कर बेहतर पूर्वानुमान और जोखिम प्रबंधन में मदद कर सकें। इस प्रतियोगिता में उत्कृष्ट नवाचारों के लिए ₹15 लाख तक के नकद पुरस्कार भी दिए जाएंगे।
NABARD क्लाइमेट इनोवेशन चैलेंज का उद्देश्य
- इस इनोवेशन चैलेंज का लक्ष्य नेशनल क्लाइमेट स्टैक विकसित करना है, जो भारत में जलवायु से जुड़े डेटा को एकीकृत और विश्लेषित करने के लिए एक डिजिटल ढांचा प्रदान करेगा। वर्तमान में जलवायु संबंधी डेटा कई अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बिखरा हुआ है।
- इस पहल के माध्यम से इन विभिन्न डेटा स्रोतों को एक साथ जोड़कर एकीकृत प्रणाली (Unified System) तैयार की जाएगी। इससे बाढ़, सूखा, हीटवेव और चक्रवात जैसे जलवायु खतरों का अधिक सटीक पूर्वानुमान लगाना संभव होगा।
एकीकृत जलवायु डेटा प्रणाली की आवश्यकता
- भारत में बढ़ती चरम मौसम घटनाएँ और पर्यावरणीय बदलाव कृषि और ग्रामीण आजीविका पर सीधे प्रभाव डाल रहे हैं। हालांकि आज बड़ी मात्रा में जलवायु डेटा उपलब्ध है, लेकिन यह जानकारी कई वेबसाइटों और शोध प्लेटफॉर्म पर बिखरी रहती है।
- इस कारण नीति-निर्माताओं, किसानों और अन्य हितधारकों के लिए रियल-टाइम निर्णय लेने हेतु आवश्यक जानकारी तक पहुँच कठिन हो जाती है। NABARD की नेशनल क्लाइमेट स्टैक पहल का उद्देश्य एक एकीकृत, इंटरऑपरेबल और भविष्य उन्मुख जलवायु सूचना प्रणाली विकसित करना है, जो आपदा तैयारी और कृषि योजना को बेहतर बना सके।
वैज्ञानिकों और तकनीकी नवप्रवर्तकों के लिए खुली प्रतियोगिता
NABARD का यह इनोवेशन चैलेंज भारत के वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं के लिए खुला है। प्रतिभागियों को ऐसे जलवायु खतरे के पूर्वानुमान मॉडल और इंटरैक्टिव डैशबोर्ड विकसित करने होंगे, जो जलवायु जोखिमों की प्रभावी भविष्यवाणी और दृश्य प्रस्तुति कर सकें।
प्रस्तुतियों का मूल्यांकन निम्न मानकों के आधार पर किया जाएगा:
- वैज्ञानिक सटीकता और नवाचार
- ग्रामीण क्षेत्रों के लिए व्यावहारिक उपयोगिता
- मॉडल की पारदर्शिता और समझने योग्य संरचना
- मौजूदा प्रणालियों के साथ इंटरऑपरेबिलिटी
- राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की क्षमता
पुरस्कार राशि और अवसर
इस चैलेंज में सर्वश्रेष्ठ समाधानों को आकर्षक पुरस्कार दिए जाएंगे:
- प्रथम पुरस्कार: ₹15 लाख
- द्वितीय पुरस्कार: ₹10 लाख
- तृतीय पुरस्कार: ₹5 लाख
इस पहल का उद्देश्य ऐसे नवाचारों की पहचान करना है जो भारत की जलवायु जोखिम प्रबंधन प्रणाली को मजबूत कर सकें।
DiCRA प्लेटफॉर्म और जलवायु डेटा अवसंरचना
- यह इनोवेशन चैलेंज DiCRA (Data in Climate Resilient Agriculture) प्लेटफॉर्म पर आधारित है। यह NABARD का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो कृषि और ग्रामीण पारिस्थितिकी से जुड़े जलवायु डेटा को एकत्र और विश्लेषित करता है।
- इस पहल के माध्यम से NABARD, DiCRA को केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से आगे बढ़ाकर पूर्ण डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलना चाहता है, जो रियल-टाइम जलवायु जानकारी प्रदान कर सके। इससे सरकारों और किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
वैश्विक साझेदारों के साथ सहयोग
- NABARD की इस जलवायु पहल को गेट्स फाउंडेशन और डल्बर्ग एडवाइजर्स के सहयोग से लागू किया जा रहा है। ये संस्थाएँ इस चुनौती के डिजाइन और कार्यान्वयन में रणनीतिक साझेदार के रूप में काम कर रही हैं।
- इनके सहयोग से तकनीकी नवाचार, जलवायु नीति और विकास रणनीतियों में वैश्विक अनुभव भारत को मिलेगा। यह साझेदारी भारत में आधुनिक जलवायु डेटा अवसंरचना विकसित करने और टिकाऊ कृषि तथा ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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