भारत में म्यूचुअल फंड शुल्क: सेबी में क्या बदलाव हो रहा है?

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड शुल्क ढांचे (Mutual Fund Fee Framework) में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव रखते हुए एक परामर्श पत्र (Consultation Paper) जारी किया है। इन सुधारों का उद्देश्य म्यूचुअल फंड से जुड़े शुल्कों को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और निवेशक-हितैषी बनाना है। सेबी का यह कदम न केवल निवेशक संरक्षण (Investor Protection) को मजबूत करेगा, बल्कि भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग को वैश्विक मानकों के अनुरूप भी लाएगा।

प्रमुख प्रस्ताव

1. टैक्स और सरकारी शुल्क को TER से बाहर करना:
सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT), गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) और स्टाम्प ड्यूटी जैसी सरकारी देनदारियों को अब टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) में शामिल नहीं किया जाएगा।
इन शुल्कों को अलग से दर्शाया जाएगा और निवेशकों से सीधे वसूला जाएगा

2. एएमसी के लिए अतिरिक्त 5 बेसिस पॉइंट्स खर्च का हटाना:
एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (AMCs) जो अब तक AUM पर 5 bps का अतिरिक्त शुल्क वसूल रही थीं, उसे समाप्त करने का प्रस्ताव है।

3. TER स्लैब में आंशिक वृद्धि से संतुलन:
खुली समाप्ति वाली सक्रिय योजनाओं (Open-ended active schemes) के लिए पहले दो TER स्लैब में 5 bps की वृद्धि प्रस्तावित है, ताकि ऊपर बताए गए हटाव का संतुलन बना रहे।

4. वैकल्पिक प्रदर्शन-आधारित TER ढांचा (Performance-Linked TER):
एएमसी चाहें तो अपने शुल्क को फंड के प्रदर्शन से जोड़ सकती हैं — यानी बेहतर प्रदर्शन पर थोड़ी अधिक फीस ली जा सकेगी। इससे लचीलापन और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगे।

5. ब्रोकरेज और लेनदेन लागत पर सख्त सीमा:

  • कैश मार्केट में ब्रोकरेज सीमा 12 bps से घटाकर 2 bps की जा सकती है।

  • डेरिवेटिव्स में 5 bps से घटाकर 1 bps की सीमा प्रस्तावित है।

6. पारदर्शिता और खुलासा (Transparency & Disclosure):
म्यूचुअल फंडों को अब लागत के सभी घटक स्पष्ट रूप से अलग-अलग दर्शाने होंगे, जिससे निवेशकों को समझ में आए कि वे किस सेवा के लिए भुगतान कर रहे हैं, और विभिन्न योजनाओं की तुलना आसान हो सके।

7. जन-सुझाव आमंत्रित:
सेबी ने इस मसौदे पर 17 नवंबर 2025 तक सार्वजनिक प्रतिक्रिया आमंत्रित की है।

निवेशकों और उद्योग के लिए अगला कदम

निवेशकों के लिए:

  • अपने मौजूदा फंडों के TER और शुल्क-प्रकटीकरण (Fee Disclosures) पर नजर रखें।

  • यदि कोई फंड परफॉर्मेंस-लिंक्ड फीस मॉडल अपनाता है, तो देखें कि वह आपके जोखिम-लाभ प्रोफ़ाइल के अनुकूल है या नहीं।

एएमसी (Asset Management Companies) के लिए:

  • अपने संचालन खर्च और आय संरचना की समीक्षा करें।

  • पारदर्शिता, शासन (Governance) और ऑडिट सिस्टम को अपडेट करें।

  • TER और परफॉर्मेंस फीस से जुड़ी रणनीति को नया रूप दें।

वितरक और सलाहकार (Distributors & Advisors):

  • ग्राहकों को नए शुल्क ढांचे की स्पष्ट जानकारी दें।

  • सलाह और संचार प्रणालियों को अपडेट करें ताकि निवेशक बदलावों को सही से समझ सकें।

नियामक और उद्योग संस्थान:

  • नए ढांचे के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश (Guidelines) तैयार करें।

  • निवेशक शिक्षा (Investor Education) पर बल दें और संक्रमण प्रक्रिया को सुचारू बनाएं।

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vikash

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