निर्माणाधीन डेटा सेंटर क्षमता में मुंबई विश्व स्तर पर छठे स्थान पर

मुंबई ने वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर निर्माण क्षमता में 97 शहरों में से 6वां स्थान हासिल किया है, जैसा कि कशमैन एंड वेकफील्ड की नवीनतम रिपोर्ट ‘ग्लोबल डेटा सेंटर मार्केट कम्पैरिजन 2025’ में बताया गया है। वर्तमान में शहर में 335 मेगावाट (MW) क्षमता के डेटा सेंटर निर्माणाधीन हैं, जिससे यह एशिया-पैसिफिक (APAC) क्षेत्र में शीर्ष पर है। इसके चलते मुंबई की ऑपरेशनल क्षमता में 62% की वृद्धि का अनुमान है। इस तेजी का मुख्य कारण है हाइपरस्केलर्स की बढ़ती मांग, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई आधारित वर्कलोड्स का विस्तार, और शहर की मजबूत डिजिटल एवं पावर अवसंरचना।

समाचार में क्यों?

कशमैन एंड वेकफील्ड ने वर्ष 2025 का ‘ग्लोबल डेटा सेंटर मार्केट कम्पैरिजन रिपोर्ट’ जारी किया, जिसमें 97 वैश्विक बाजारों को शामिल किया गया है। मुंबई ने निर्माणाधीन डेटा सेंटर क्षमता के मामले में वैश्विक स्तर पर 6वां और APAC क्षेत्र में पहला स्थान प्राप्त किया है। यह विकास भारत को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक उभरता हुआ केंद्र बना रहा है।

वैश्विक रैंकिंग – निर्माणाधीन डेटा सेंटर क्षमता (शीर्ष 10 शहर)

  1. वर्जीनिया – 1,834 MW

  2. अटलांटा – 1,078 MW

  3. कोलंबस – 546 MW

  4. डलास – 500 MW

  5. फीनिक्स – 478 MW

  6. मुंबई – 335 MW

  7. ऑस्टिन/सैन एंटोनियो – 325 MW

  8. रेनो – 305 MW

  9. लंदन – 265 MW

  10. डबलिन – 249 MW

मुंबई की डेटा सेंटर विशेषताएं

  • निर्माणाधीन क्षमता: 335 मेगावाट (2024 के अंत तक)

  • संभावित वृद्धि: 62% तक परिचालन क्षमता में इजाफा

  • वर्तमान योगदान: भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता का 50% से अधिक

  • प्रमुख परियोजनाएं: बड़े क्लाउड प्रोवाइडर (Hyperscalers) जैसे AWS, Google, Microsoft, Meta द्वारा प्रेरित

मुख्य सहायक तत्व

  • 12 सबमरीन केबल लैंडिंग स्टेशन

  • हाल ही में जोड़ा गया MIST (म्यांमार/मलेशिया-इंडिया-सिंगापुर ट्रांजिट) केबल लैंडिंग

  • मजबूत डिजिटल नेटवर्क और ऊर्जा आपूर्ति अवसंरचना

चुनौतियां

  • प्रमुख क्षेत्रों में भूमि की उपलब्धता की कमी

  • कुछ स्थानों पर बिजली की लागत और पहुंच की समस्या

पृष्ठभूमि और प्रमुख कारक

  • क्लाउड कंप्यूटिंग, एआई, IoT और 5G जैसी तकनीकों का विस्तार वैश्विक डेटा उपयोग को तीव्र गति से बढ़ा रहा है, जिससे आधुनिक डेटा सेंटर की मांग भी तेज़ हो रही है।

  • मुंबई का सामरिक समुद्री स्थान, वित्तीय राजधानी होने का दर्जा और मजबूत तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र इसे वैश्विक डेटा केंद्रों के लिए उपयुक्त बनाते हैं।

  • AWS, Google Cloud, Microsoft Azure और Meta जैसे हाइपरस्केलर्स भारत में अपना विस्तार कर रहे हैं, जिससे यह वृद्धि और तेज़ हो रही है।

महत्त्व

  • भारत की वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में स्थिति को और मजबूत करता है।

  • मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी पहल को तकनीकी अवसंरचना से समर्थन देता है।

  • FDI को आकर्षित करता है, खासकर फिनटेक, ई-कॉमर्स और एआई रिसर्च जैसे डेटा-आधारित क्षेत्रों में।

  • डेटा लोकलाइजेशन और भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए बेहतर लेटेंसी को सुनिश्चित करता है।

  • स्मार्ट शहरों और सुरक्षित डिजिटल सेवाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।

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vikash

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