ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने भारत के आर्थिक आउटलुक में बदलाव किया है और FY27 के लिए GDP ग्रोथ के अनुमान को 6.8% से घटाकर 6% कर दिया है। यह कटौती पश्चिम एशिया क्षेत्र को लेकर बढ़ती चिंताओं, बढ़ती ऊर्जा कीमतों और घरेलू मांग में कमजोरी को दर्शाती है। चूंकि भारत आयातित ऊर्जा पर बहुत ज़्यादा निर्भर है, इसलिए वैश्विक उथल-पुथल का असर महंगाई, खपत और औद्योगिक गतिविधियों पर पड़ता है।
इस संशोधित अनुमान का मुख्य कारण बाहरी झटके और घरेलू दबाव हैं।
मूडीज़ ने बताया कि,
पश्चिम एशिया क्षेत्र में मौजूदा तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को बाधित कर दिया है।
मुख्य चिंता होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है।
यहाँ हुई बाधाओं के कारण:
चूँकि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसलिए वह इस तरह के झटकों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है।
एनर्जी की ज़्यादा कीमतों से महंगाई थोड़ी बढ़ने की उम्मीद है।
इससे कई मुश्किलें पैदा होती हैं, जैसे,
मूडीज़ ने उर्वरकों और कुकिंग गैस की संभावित कमी की ओर इशारा किया है, जिसका असर कृषि उत्पादकता और घरेलू उपभोग पर पड़ सकता है।
चूँकि कृषि और उपभोग भारतीय अर्थव्यवस्था के मुख्य स्तंभ हैं, इसलिए इनमें किसी भी तरह की बाधा विकास की गति को काफ़ी धीमा कर सकती है।
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