Home   »   Unesco की विश्व धरोहर सूची में...

Unesco की विश्व धरोहर सूची में शामिल असम का मोइदम

Unesco की विश्व धरोहर सूची में शामिल असम का मोइदम |_3.1

असम के चराइदेव जिले में स्थित अहोम युग के ‘मोइदम’ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है। पूर्वोत्तर से पहली बार किसी धरोहर ने इस सूची में जगह बनाई है। यह निर्णय नई दिल्ली में यूनेस्को की 46वीं विश्व धरोहर समिति की बैठक के दौरान लिया गया। वर्ष 2023-24 के लिए यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में 4 जुलाई को शामिल करने के लिए भारत की ओर से ‘मोइडम्स’ को नामांकन के रूप में प्रस्तुत किया गया।

बता दें कि अहोम मोइदम पिरामिड सरीखी अनूठी टीलेनुमा संरचनाएं हैं, जिनका इस्तेमाल ताई-अहोम वंश द्वारा अपने राजवंश के सदस्यों को उनकी प्रिय वस्तुओं के साथ दफनाने के लिए किया जाता था। यानी ये असम के शाही परिवारों का कब्रिस्तान है। इसे शामिल करने की सिफारिश अंतरराष्ट्रीय सलाहकार संस्था आईसीओएमओएस ने की थी।

जानें ‘मोइदम’ के बारे में

असम के चराईदेव में स्थित ‘मोइदम’ अहोम राजाओं और रानियों के दफन स्थल हैं। ‘मोइदम’ नाम ताई शब्द ‘फ्रांग-माई-डैम’ या ‘माई-टैम’ से लिया गया है – जिसका अर्थ है दफनाना और मृतक की आत्मा। ये मिस्र के पिरामिडों और मध्यकालीन युग के असम के कलाकारों और राजमिस्त्रियों की शानदार वास्तुकला और विशेषज्ञता के माध्यम से देखे गए आश्चर्य के तत्वों के समान हैं।

‘मोइदम’ गुंबददार कक्ष (चौ-चाली) होते हैं, जो प्रायः दो मंजिला होते हैं, जिनमें प्रवेश के लिए मेहराबदार मार्ग होता है तथा अर्धगोलाकार मिट्टी के टीलों के ऊपर ईंटों और मिट्टी की परतें बिछाई जाती हैं। यूनेस्को के अनुसार, टीले का आधार बहुकोणीय दीवार और पश्चिम की ओर एक धनुषाकार प्रवेशद्वार द्वारा सुदृढ़ किया गया है।

क्यों खास है मोइदम

ये टीले अपनी बनावट के लिए बेहद खास हैं और अहोम के विदेशी प्रभावों को दर्शाते हैं। ये पूरे ऊपरी असम में पाए जाते हैं, जहां अहोम की पहली राजधानी चरईदेव है। चराईदेव में अहोम राजवंश को पूरे ताई-अहोम संस्कारों से दफनाया गया है। इस जगह को काफी पवित्र माना जाता है।

prime_image
QR Code
Scan Me