मिशन सुदर्शन चक्र: भारत के ड्रोन डिफेंस को मज़बूत बनाना

भारत ने उभरते हवाई खतरों, विशेषकर शत्रुतापूर्ण ड्रोन से निपटने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र की शुरुआत की है। यह एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य देश के लिए समग्र, बहुस्तरीय वायु रक्षा कवच तैयार करना है। यह पहल आधुनिक युद्ध में मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAVs) की बढ़ती भूमिका और पाकिस्तान से लगी संवेदनशील सीमाओं पर बढ़ते ड्रोन खतरों के मद्देनज़र भारत की रक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है।

बढ़ता ड्रोन खतरा और रणनीतिक आवश्यकता

हाल के वर्षों में ड्रोन कम लागत लेकिन उच्च प्रभाव वाले असममित हथियार के रूप में उभरे हैं। इनका उपयोग—

  • निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने
  • हथियारों व नशीले पदार्थों की तस्करी
  • सैन्य व नागरिक लक्ष्यों पर सटीक हमलों के लिए किया जा रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन तैनाती के प्रयासों और रूस–यूक्रेन संघर्ष में उनके व्यापक इस्तेमाल ने इनके विघटनकारी प्रभाव को उजागर किया है। भारत में भी सीमा पार ड्रोन घुसपैठ की घटनाओं में तेज़ वृद्धि हुई है, जिससे छोटे और नीची उड़ान भरने वाले लक्ष्यों के विरुद्ध पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों की सीमाएँ स्पष्ट हुईं। ऐसे में विशेष काउंटर-ड्रोन आर्किटेक्चर अब रणनीतिक आवश्यकता बन गया है।

मिशन सुदर्शन चक्र और वायु रक्षा आधुनिकीकरण

मिशन सुदर्शन चक्र का लक्ष्य एकीकृत वायु रक्षा ढांचा स्थापित करना है, जो—

  • लड़ाकू विमान
  • मिसाइल
  • मानवरहित हवाई प्रणालियाँ (ड्रोन) जैसे खतरों का सामना कर सके।

इस कार्यक्रम को 2035 तक पूरा करने का लक्ष्य है और यह इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) जैसी मौजूदा व्यवस्थाओं का पूरक होगा। पहल का केंद्र लेयर्ड डिफेंस है—जिसमें लंबी दूरी की अवरोधन प्रणालियों के साथ अल्प दूरी और बिंदु-रक्षा समाधान शामिल होंगे। यह भारत के प्लेटफ़ॉर्म-केंद्रित दृष्टिकोण से नेटवर्क-केंद्रित व खतरा-विशिष्ट वायु रक्षा योजना की ओर संक्रमण को दर्शाता है।

संयुक्त काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (CUAS) ग्रिड

मिशन सुदर्शन चक्र के समानांतर, भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना मिलकर एक संयुक्त CUAS ग्रिड विकसित कर रही हैं।

मुख्य विशेषताएँ

  • सेंसर, कमांड सेंटर और प्रतिक्रिया इकाइयों का एकीकरण
  • संयुक्त वायु रक्षा केंद्रों की स्थापना
  • तीनों सेनाओं के बीच रियल-टाइम डेटा साझा करना
  • तेज़ पहचान, आकलन और समन्वित प्रतिक्रिया

यह ग्रिड सीमाओं, तटरेखाओं और महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को मजबूत करेगा।

सॉफ्ट-किल और हार्ड-किल उपाय

मिशन सुदर्शन चक्र के तहत भारत की काउंटर-ड्रोन रणनीति दोहरी पद्धति पर आधारित है—

सॉफ्ट-किल उपाय (बिना भौतिक विनाश):

  • इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम
  • संचार संकेत बाधित करना
  • GNSS (सैटेलाइट नेविगेशन) जैमिंग

हार्ड-किल उपाय (भौतिक निष्क्रियता):

  • डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स
  • लेज़र आधारित प्रणालियाँ
  • पॉइंट-डिफेंस गन और काइनेटिक इंटरसेप्टर

सॉफ्ट-किल और हार्ड-किल का यह संयोजन लचीलापन, स्केलेबिलिटी और प्रभावशीलता सुनिश्चित करता है, जिससे विविध ड्रोन खतरों का सफलतापूर्वक मुकाबला किया जा सके।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस 2026: गौरव, संस्कृति और प्रगति

अरुणाचल प्रदेश स्थापना दिवस 2026 (Arunachal Pradesh Foundation Day 2026) 20 फरवरी को मनाया जाएगा।…

10 hours ago

भारत एआई शिखर सम्मेलन 2026 में ‘नई दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट प्रतिबद्धताएँ’ लॉन्च

भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी…

11 hours ago

2026 का बिजनेस माइलस्टोन: राजस्व की दौड़ में अमेज़न ने वॉलमार्ट को पीछे छोड़ा

वर्ष 2026 में एक ऐतिहासिक कॉर्पोरेट उपलब्धि दर्ज हुई, जब Amazon ने वार्षिक राजस्व के…

11 hours ago

IPC ने प्रतिबंध हटाया: रूसी और बेलारूसी खिलाड़ी मिलान-कोर्टिना 2026 में भाग लेंगे

कई वर्षों के प्रतिबंधों के बाद, अंतर्राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (IPC) ने आधिकारिक रूप से मिलान-कोर्टिना…

11 hours ago

विश्व में भूख से लड़ने के लिए दो लाख टन चावल आपूर्ति करेगा भारत

भारत दुनियाभर में चल रहे मानवीय कार्यों के लिए दो लाख टन टूटे चावल की…

12 hours ago

वैश्विक कूटनीतिक पहल के बीच भारत ट्रंप के गाज़ा शांति बोर्ड में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल

भारत ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयोजित गाज़ा पुनर्निर्माण और स्थिरीकरण पर केंद्रित…

12 hours ago