महाकुंभ में स्थापित हुआ विश्व का सबसे बड़ा महामृत्युंजय यंत्र

झूंसी हवेलियों, प्रयागराज के तपोवन आश्रम में स्थापित विश्व का पहला महामृत्युंजय यंत्र, जो 52 फीट लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई में है, एक अद्भुत आध्यात्मिक चमत्कार है। यह पवित्र यंत्र श्रद्धालुओं को भगवान शिव की उच्च चेतना से जोड़ने का विश्वास दिलाता है।

महामृत्युंजय यंत्र का आध्यात्मिक महत्व

महामृत्युंजय यंत्र, जिसे “मृत्यु पर विजय” का यंत्र भी कहा जाता है, निम्नलिखित लाभ प्रदान करता है:

  • मृत्यु, बीमारी और खतरों के डर को दूर करता है।
  • श्रद्धालुओं में साहस और सकारात्मकता बढ़ाता है।
  • भगवान शिव की उच्च ऊर्जा से जुड़ने का माध्यम बनता है।

महत्त्वपूर्ण विवरण

निर्माण और लागत

  • 52 दिनों में निर्मित, जिसकी लागत ₹4 करोड़ है।
  • 52x52x52 फीट का परिपूर्ण चौकोर आकार।

मंत्रोच्चार और रुद्राक्ष स्थापना

  • मकर संक्रांति (14 जनवरी, 2025) से 151 आचार्यों द्वारा महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जा रहा है।
  • 11,11,111 पंचमुखी रुद्राक्षों को अभिमंत्रित कर निशुल्क वितरित किया जाएगा।
  • रुद्राक्ष प्राप्त करने के लिए भक्तों को आश्रम में अपना नाम और पता पंजीकृत करना होगा।

आध्यात्मिकता और विज्ञान का संगम

52 अक्षरों का प्रतीकवाद

  • महामृत्युंजय मंत्र के 52 अक्षर शरीर और देश के 52 ऊर्जा केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • यह 52 हिंदी वर्णमाला और 52 ध्वनियों से जुड़ा है, जो सनातन धर्म की नींव को दर्शाता है।

यंत्र की वैज्ञानिक संरचना

  • यंत्र की डिजाइन मेरुदंड (spinal column) का अनुकरण करती है, जो ऊर्जा प्रवाह और ब्रह्मांडीय कनेक्टिविटी का प्रतीक है।
  • यह:
    • मंत्रों और ध्यान के माध्यम से दिव्य शक्तियों को जागृत करता है।
    • एक सकारात्मक ऊर्जा क्षेत्र उत्पन्न करता है, जिससे आसपास के लोग प्रभावित होते हैं।

भविष्य की योजनाएँ

12 ज्योतिर्लिंगों पर यंत्र की स्थापना

शुरुआत निम्नलिखित स्थानों से होगी:

  • सोमनाथ, गुजरात
  • केदारनाथ, उत्तराखंड
  • भीमाशंकर, महाराष्ट्र
  • त्र्यंबकेश्वर, महाराष्ट्र

भारत को वैश्विक शक्ति बनाना

महंत सहजानंद जी के अनुसार, इन यंत्रों से उत्पन्न सकारात्मक ऊर्जा:

  • भारत को एक महाशक्ति और अग्रणी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनाएगी।
  • सनातन धर्म का परचम ऊंचा करेगी, जिससे विश्व में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव फैलेगा।

यंत्र की जागृति

ज्योतिषाचार्य आचार्य हरे कृष्ण शुक्ल ने इसे ईश्वरीय आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए रनवे बनाने जैसा बताया।

  • यंत्र, मंत्र और तंत्र के माध्यम से भगवान शिव की ऊर्जा को आह्वान किया जाता है।
  • संत जाप और ध्यान द्वारा यंत्र की शक्ति सक्रिय करते हैं।

अनुभव और अतिरिक्त जानकारी

सद्गुरु मां उषा, जो महामृत्युंजय यंत्र अनुसंधान संस्थान से जुड़ी हैं, ने यंत्र को एक ऊर्जा स्रोत बताया, जो किसी भी नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मकता में बदल सकता है। उन्होंने कहा कि यह यंत्र:

  • कई किलोमीटर तक सकारात्मकता फैलाता है।
  • सभी प्रकार की नकारात्मकता और अवसाद को दूर करता है।
श्रेणी विवरण
समाचार में क्यों झूंसी हवेलियों, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के तपोवन आश्रम में 52x52x52 फीट का विश्व का पहला महामृत्युंजय यंत्र स्थापित।
महत्त्व – श्रद्धालुओं को भगवान शिव की उच्च चेतना से जोड़ता है।
– मृत्यु, बीमारी और खतरों के डर को दूर करता है।
– साहस, सकारात्मकता और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।
निर्माण विवरण – 52 दिनों में ₹4 करोड़ की लागत से निर्मित।
– 52x52x52 फीट का परिपूर्ण चौकोर आकार।
रुद्राक्ष स्थापना – मकर संक्रांति (14 जनवरी, 2025) से 151 आचार्य महामृत्युंजय मंत्र का जाप कर रहे हैं।
– 11,11,111 पंचमुखी रुद्राक्ष अभिमंत्रित कर भक्तों को निःशुल्क वितरित किए जाएंगे।
– रुद्राक्ष प्राप्त करने के लिए भक्तों को अपना नाम और पता पंजीकृत कराना अनिवार्य।
वैज्ञानिक प्रतीकवाद – मंत्र के 52 अक्षर:
– शरीर और देश के 52 ऊर्जा केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
– 52 हिंदी वर्णमाला और ध्वनियों से जुड़े हैं, जो सनातन धर्म की नींव को दर्शाते हैं।
– यंत्र मेरुदंड (spinal column) की संरचना का अनुकरण करता है, जो ऊर्जा प्रवाह और ब्रह्मांडीय कनेक्टिविटी का प्रतीक है।
भविष्य की योजनाएँ 12 ज्योतिर्लिंगों पर स्थापना की योजना:
– सोमनाथ (गुजरात), केदारनाथ (उत्तराखंड), भीमाशंकर (महाराष्ट्र), त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र)।
– दिल्ली और अन्य प्रमुख स्थानों तक विस्तार।
भारत के लिए दृष्टिकोण – भारत को एक आध्यात्मिक महाशक्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनाने का प्रयास।
– विश्व स्तर पर सनातन धर्म का परचम मजबूत करना।
यंत्र की जागृति – यंत्र, मंत्र और तंत्र के माध्यम से जागृत।
– भगवान शिव की ऊर्जा का आह्वान कर, विश्व कल्याण और सकारात्मकता के लिए कार्य करता है।
प्रशंसापत्र – सद्गुरु मां उषा: यह यंत्र ऊर्जा का स्रोत है, जो किलोमीटर तक सकारात्मकता फैलाता है और अवसाद को दूर करता है।
– आचार्य हरे कृष्ण शुक्ल: यंत्र भगवान शिव के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए एक आध्यात्मिक रनवे के रूप में कार्य करता है।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

जनवरी में GST कलेक्शन ₹1.93 लाख करोड़ के पार क्यों पहुंचा?

भारत की कर संग्रहण स्थिति 2026 की शुरुआत में मजबूत बनी हुई है। जनवरी 2026…

3 mins ago

जानें कौन हैं एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया, जिन्होंने संभाली ईस्टर्न एयर कमांड की कमान

एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया ( Air Marshal Inderpal Singh Walia ) को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी…

2 hours ago

16वें वित्त आयोग ने 41% हिस्सेदारी का बंटवारा क्यों बनाए रखा?

केंद्र और राज्यों के बीच धन के बंटवारे ने एक नए चरण में प्रवेश कर…

2 hours ago

16.5% हिस्सेदारी के साथ कौन-सा राज्य बना भारत का नवीकरणीय ऊर्जा पावरहाउस?

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में गुजरात ने बड़ी बढ़त हासिल की है। 31 दिसंबर…

2 hours ago

विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026: प्रकृति के जीवनदायी पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण का संकल्प

World Wetlands Day 2026: विश्व आर्द्रभूमि दिवस या विश्व वेटलैंड्स डे (World Wetlands Day) पूरे…

3 hours ago

रूमेटॉइड आर्थराइटिस जागरूकता दिवस 2026: गठिया के प्रति समझ और जागरूकता का संकल्प

रूमेटॉइड आर्थराइटिस को अक्सर केवल जोड़ों के दर्द के रूप में समझ लिया जाता है,…

5 hours ago