कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को इको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित किया गया

पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को उस समय नई मजबूती मिली, जब राजस्थान के कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के चारों ओर इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) घोषित किया गया। यह अधिसूचना अरावली पर्वत श्रृंखला की नाज़ुक पारिस्थितिकी की रक्षा पर केंद्रित है, साथ ही यह सुनिश्चित करती है कि संरक्षण के साथ-साथ आसपास रहने वाले समुदायों का कल्याण और सतत विकास भी बना रहे।

क्यों चर्चा में?

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आसपास क्षेत्र को इको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित करने की अधिसूचना जारी की है। इसका उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण करना और अभयारण्य के आसपास रहने वाले स्थानीय समुदायों को सहयोग देना है।

इको-सेंसिटिव ज़ोन की घोषणा

  • कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य (अरावली पर्वत श्रृंखला में स्थित) के चारों ओर शून्य से एक किलोमीटर तक के क्षेत्र को ESZ घोषित किया गया है।
  • इको-सेंसिटिव ज़ोन वे क्षेत्र होते हैं, जिन्हें पर्यावरण कानूनों के तहत संरक्षित क्षेत्रों के आसपास गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए अधिसूचित किया जाता है।
  • इस घोषणा से अनियंत्रित विकास, खनन और औद्योगिक विस्तार पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
  • ESZ का दर्जा यह सुनिश्चित करता है कि संरक्षण प्राथमिकताओं और नियंत्रित मानवीय गतिविधियों के बीच संतुलन बना रहे, जिससे वन, जल संसाधन और वन्यजीव आवास सुरक्षित रहें।

जैव विविधता और वन्यजीव महत्व

  • कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य अपनी समृद्ध जैव विविधता और विविध आवासों के लिए प्रसिद्ध है।
  • यहाँ तेंदुआ, धारीदार लकड़बग्घा, जंगल बिल्ली, भारतीय पैंगोलिन, नीलगाय और चिंकारा जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं।
  • यह क्षेत्र कई पक्षी प्रजातियों का भी आवास है, जिनमें पेंटेड फ्रैंकोलिन प्रमुख है, जिससे यह पक्षी संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनता है।
  • आसपास के क्षेत्र को ESZ घोषित करने से प्रवास गलियारों, प्रजनन स्थलों और खाद्य शृंखलाओं की सुरक्षा होगी, जो इन प्रजातियों के अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं।

स्थानीय और आदिवासी समुदायों के लिए लाभ

  • केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के अनुसार, ESZ अधिसूचना से अभयारण्य के आसपास रहने वाले स्थानीय और आदिवासी समुदायों को सहयोग मिलेगा।
  • इसका उद्देश्य केवल संरक्षण नहीं, बल्कि सतत आजीविका को भी बढ़ावा देना है।
  • जैविक खेती, कृषि-वानिकी (एग्रोफॉरेस्ट्री) और पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि समुदायों की आजीविका सुरक्षित रहे और प्रकृति का संरक्षण भी हो सके।

इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) के बारे में

विषय विवरण
इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास के क्षेत्र, जो बफर/शॉक एब्जॉर्बर के रूप में कार्य करते हैं।
नीतिगत आधार राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना (2002–2016) के अनुसार, सामान्यतः पार्क/अभयारण्य की सीमा से 10 किमी तक के क्षेत्र को ESZ घोषित किया जाता है।
10 किमी नियम यह एक दिशानिर्देश है; वास्तविक ESZ की सीमा क्षेत्र-विशेष की पारिस्थितिकी के अनुसार कम–ज़्यादा हो सकती है।
10 किमी से बाहर क्षेत्र यदि कोई क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हो (जैसे संवेदनशील गलियारे), तो 10 किमी से बाहर भी ESZ घोषित किया जा सकता है।
ESZ का उद्देश्य नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र को मानव गतिविधियों के नकारात्मक प्रभाव से बचाना।
संक्रमण क्षेत्र की भूमिका संरक्षित क्षेत्र के भीतर कड़ा संरक्षण → बाहर अपेक्षाकृत कम नियंत्रण (संतुलन बनाए रखना)।
स्थानीय लोगों पर प्रभाव स्थानीय लोगों की दैनिक गतिविधियों में अनावश्यक बाधा न डालना।
मुख्य लक्ष्य संरक्षित क्षेत्रों के आसपास के पर्यावरण को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाना।
ESZ में निषिद्ध गतिविधियाँ व्यावसायिक खनन, आरा मिलें, लकड़ी का व्यावसायिक उपयोग, वृक्षों की कटाई (नियंत्रित मामलों को छोड़कर)।
ESZ में अनुमत गतिविधियाँ मौजूदा कृषि/बागवानी, वर्षा जल संचयन, जैविक खेती, अन्य गैर-हानिकारक गतिविधियाँ।
भारत में ESZ की संख्या पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा अधिसूचित; 600 से अधिक ESZ देशभर में घोषित।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

NASA Artemis II Mission: 50 साल बाद इंसानों की चांद यात्रा शुरू, जानें पूरी डिटेल

दुनिया एक बार फिर इतिहास बनते देखने जा रही है। NASA का Artemis II मिशन…

9 hours ago

RBI में बड़ा बदलाव: रोहित जैन बने नए डिप्टी गवर्नर, जानें कौन हैं, करियर और बैकग्राउंड

भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए Reserve Bank of India के नए…

2 days ago

भारत में ‘झंडों का शहर’ कौन सा है? 99% लोग नहीं जानते सही जवाब – जानें पूरा सच

क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा शहर भी है, जिसे ‘झंडों का…

2 days ago

भारत में सबसे ज्यादा हाथी कहां हैं? जानें टॉप Elephant Reserves और चौंकाने वाले आंकड़े

भारत में वन्यजीवों की समृद्ध विरासत के बीच एशियाई हाथी एक महत्वपूर्ण प्रजाति है। ऐसे…

2 days ago

CGDA नई नियुक्ति 2026: अनुराग्रह नारायण दास बने रक्षा लेखा महानियंत्रक, जानें पूरा प्रोफाइल

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किया गया है। अनुग्रह…

3 days ago

IFFI 2026: Goa में होने वाले 57वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में आशुतोष गोवारिकर होंगे फेस्टिवल डायरेक्टर

भारतीय सिनेमा और इंटरनेशनल फिल्म इंडस्ट्री के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सूचना एवं…

3 days ago