अरुणाचल प्रदेश का नवगठित जिला केयी पन्योर अब भारत का पहला ‘बायो-हैप्पी जिला’ बनने जा रहा है। यह पहल जैव विविधता संरक्षण और मानवीय कल्याण को एकीकृत करने का एक अभिनव प्रयास है, जो सतत विकास की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह परियोजना प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन द्वारा प्रतिपादित “बायोहैप्पीनेस” की अवधारणा को पुनर्जीवित करती है और पारिस्थितिकी, आजीविका तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य के समन्वय से आधारित एक विकास मॉडल को बढ़ावा देती है।
बायोहैप्पीनेस की अवधारणा और उसका पुनरुद्धार
एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फ़ाउंडेशन द्वारा ज़िला प्रशासन के सहयोग से इस पहल को लागू किया जा रहा है। फ़ाउंडेशन की अध्यक्ष सौम्या स्वामीनाथन के अनुसार, परियोजना का फोकस—
- आजीविका का आकलन
- कृषि-जैव विविधता (Agro-biodiversity) का मानचित्रण
- पारिस्थितिक तंत्र का मूल्यांकन पर केंद्रित है।
बायोहैप्पीनेस का आशय उस मानव कल्याण की अवस्था से है, जो तब प्राप्त होती है जब जैव विविधता का संरक्षण और सतत उपयोग करके पोषण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, आय और आजीविका को सुदृढ़ किया जाता है। यह अवधारणा लोगों और प्रकृति के बीच सामंजस्य पर आधारित है, जहाँ संरक्षण को विकास की बाधा नहीं बल्कि उसकी आधारशिला माना जाता है।
आजीविका और पारिस्थितिकी पर विशेष ध्यान
इस परियोजना में—
- पारंपरिक कृषि प्रणालियों
- स्वदेशी ज्ञान परंपराओं
- जैव विविधता-समृद्ध परिदृश्यों का गहन अध्ययन किया जाएगा।
पूर्वी हिमालय में स्थित अरुणाचल प्रदेश भारत के सबसे समृद्ध जैव विविधता क्षेत्रों में से एक है। इसके वन, नदियाँ और जनजातीय खेती की परंपराएँ इसे समुदाय-आधारित, बॉटम-अप विकास मॉडल के परीक्षण के लिए आदर्श बनाती हैं। केयी पन्योर से प्राप्त निष्कर्ष भविष्य में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील और जनजातीय क्षेत्रों के लिए सतत ग्रामीण विकास नीतियों को दिशा देंगे।
पर्यावरण, स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी का संबंध
चेन्नई में आयोजित एक स्थिरता संवाद में सौम्या स्वामीनाथन ने पर्यावरण क्षरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच सीधे संबंध पर प्रकाश डाला। प्रमुख बिंदु—
- कचरे से निकलने वाला मीथेन एक बड़ा जलवायु जोखिम
- मीथेन अल्पकालिक लेकिन अत्यंत शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस
- मीथेन में कमी से तत्काल जलवायु लाभ संभव
फ़ाउंडेशन IIT मद्रास और श्री रामचंद्रा उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के साथ मिलकर लैंडफ़िल के पास रहने वाले समुदायों के स्वास्थ्य जोखिमों का आकलन भी करेगा।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- बायोहैप्पीनेस की अवधारणा: एम. एस. स्वामीनाथन
- केयी पन्योर: अरुणाचल प्रदेश का नवगठित ज़िला
- पूर्वी हिमालय: भारत के प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट्स में से एक
- मीथेन: अत्यधिक शक्तिशाली लेकिन अल्पकालिक ग्रीनहाउस गैस
- जैव विविधता-आधारित विकास: पर्यावरण + आजीविका + स्वास्थ्य का समन्वय
व्यापक स्थिरता विमर्श
इस पहल पर चर्चा द हिंदू और सवेथा इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेज़ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित सस्टेनेबिलिटी डायलॉग्स में की गई, जहाँ संस्थानों, प्रौद्योगिकी और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की भूमिका को दीर्घकालिक स्थिरता के लिए निर्णायक बताया गया।


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