Home   »   ज्योग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्रार ने कश्मीरी केसर...

ज्योग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्रार ने कश्मीरी केसर को प्रदान किया भौगोलिक संकेत

ज्योग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्रार ने कश्मीरी केसर को प्रदान किया भौगोलिक संकेत |_50.1
भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री (Geographical Indications Registry) द्वारा कश्मीरी केसर को भौगोलिक संकेत (Geographical Indication) टैग दिया गया है। ये केसर कश्मीर के कुछ इलाकों में उगाया जाता है, जिनमे श्रीनगर, पुलवामा, बडगाम और किश्तवाड़ शामिल हैं।

कश्मीरी केसर के लिए आवेदन जम्मू और कश्मीर सरकार के कृषि निदेशालय द्वारा शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी कश्मीर और केसर रिसर्च स्टेशन, डूसू (पंपोर) के सहयोग से दायर किया गया था।

क्या है कश्मीरी केसर?
इस कश्मीरी केसर की अनूठी विशेषता इसके अधिक लम्बे और मोटे धब्बे, प्राकृतिक गहरा-लाल रंग का धब्बा, उच्च सुगंध, कड़वा स्वाद, रासायनिक मुक्त प्रसंस्करण और उच्च मात्रा में सफारी (स्वाद), क्रोकिन (रंग की ताकत, और पिक्रोकार्सिन (कड़वाहट) है। क्रोसिन की उच्च सांद्रता के कारण कश्मीरी केसर गुणवत्ता में सर्वश्रेष्ठ है। कोसिन एक कैरोटीनॉयड वर्णक है, जो केसर को उसके रंग और औषधीय गुण देता है। जो तत्व ईरानी केसर में 682 प्रतिशत हैं वहीं कश्मीरी केसर में 872 प्रतिशत पाए जाते हैं। इसी वजह से कश्मीर केसर गहरा रंग, बेहतर जायका और औषधीय गुण प्रदान करता है। इस केसर की खेती और बुवाई जम्मू और कश्मीर के करवाई (उच्च भूमि क्षेत्रो) में स्थानीय किसानों द्वारा की जाती है और यह अपने अद्वितीय गुणों के लिए जाना जाता है, जो केवल जम्मू और कश्मीर में उगाए और उत्पादित केसर में पाया जा सकता है।

उपरोक्त समाचारों से आने-वाली परीक्षाओं के लिए
महत्वपूर्ण तथ्य-

  • जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर: गिरीश चंद्र मुर्मू.
Thank You, Your details have been submitted we will get back to you.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *