न्यायमूर्ति नेरनहल्ली श्रीनिवासन संजय गौड़ा ने आधिकारिक रूप से गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। इससे पहले वे कर्नाटक उच्च न्यायालय में कार्यरत थे। उनका यह तबादला सुप्रीम कोर्ट की योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में विविधता और बेहतर प्रशासन सुनिश्चित करना है।
न्यायमूर्ति गौड़ा ने सोमवार, 9 जून 2025 को शपथ ली। उन्हें शपथ गुजरात उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने दिलाई। यह कार्यक्रम गुजरात उच्च न्यायालय की प्रथम अदालत (First Court), वडोदरा में आयोजित हुआ। इस अवसर पर एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी, वरिष्ठ वकील और अन्य विशिष्ट अतिथि भी उपस्थित थे।
58 वर्षीय न्यायमूर्ति संजय गौड़ा ने वर्ष 1989 में वकालत की शुरुआत की थी। उन्हें नवंबर 2019 में कर्नाटक उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बाद, सितंबर 2021 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विधिक मामलों की सुनवाई की है।
अप्रैल 2025 में, भारत के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सात उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के तबादले की सिफारिश की थी। इनमें से चार कर्नाटक से थे, जिनमें न्यायमूर्ति गौड़ा भी शामिल थे। इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य थे:
समावेशिता (Inclusivity): विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमि के न्यायाधीशों को अलग-अलग राज्यों में सेवा का अवसर मिले।
न्याय की गुणवत्ता में सुधार: उच्च न्यायालयों के बीच अनुभव और प्रतिभा का आदान-प्रदान हो सके।
भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार के नेतृत्व में कॉलेजियम ने इन तबादलों को न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और इसे अधिक समावेशी और संतुलित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। कॉलेजियम का मानना है कि ऐसे निर्णय न्यायालयों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और विविधतापूर्ण बनाते हैं।
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