क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा शहर भी है, जिसे ‘झंडों का शहर’ कहा जाता है?
इसका सही जवाब है — Mysuru (मैसूर), कर्नाटक
यह शहर न केवल अपने भव्य महलों और शाही विरासत के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ी अपनी खास पहचान के कारण भी पूरे देश में जाना जाता है।
मैसूर को यह नाम यूं ही नहीं मिला, इसके पीछे कई मजबूत कारण हैं:
यही वजह है कि मैसूर को भारत में झंडा निर्माण का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
शाही परंपरा और दशहरा उत्सव से जुड़ी पहचान
मैसूर का प्रसिद्ध दशहरा उत्सव इसकी पहचान को और भी खास बनाता है।
यह भव्य दृश्य ही इस शहर को “झंडों का शहर” बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
स्वतंत्रता आंदोलन और झंडा सत्याग्रह
मैसूर का योगदान केवल संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्रता संग्राम में भी महत्वपूर्ण रहा है।
यही ऐतिहासिक जुड़ाव इस शहर की पहचान को और मजबूत करता है।
झंडा निर्माण में मैसूर की खास भूमिका
पहले भारत में राष्ट्रीय ध्वज केवल खादी कपड़े से बनाना अनिवार्य था।
आज भी Karnataka Khadi Gramodyoga Samyukta Sangha को तिरंगा बनाने का आधिकारिक लाइसेंस प्राप्त है।
मैसूर क्यों है खास?
इन सभी कारणों से मैसूर को भारत का ‘झंडों का शहर’ कहा जाता है।
मैसूर सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारत की देशभक्ति, संस्कृति और इतिहास का प्रतीक है।
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