ईरान ने अमेरिकी-इजरायली हमलों के जवाब में IAEA के साथ सहयोग निलंबित करने का फैसला किया

इजरायल के साथ 12 दिनों तक चले संघर्ष के बाद ईरान की संसद (मजलिस) ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ सहयोग को निलंबित करने का प्रस्ताव पारित किया है। यह कदम अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु स्थलों पर हवाई हमलों के बाद उठाया गया है – जबकि ईरान IAEA और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) दोनों का सदस्य है। इसके समानांतर, भारत में ईरान के दूतावास ने हाल की शत्रुता के दौरान भारत के लोगों की एकजुटता के लिए उनके प्रति गहरा आभार व्यक्त किया, जो कूटनीतिक आख्यानों और परमाणु निगरानी गतिशीलता में बदलाव को दर्शाता है।

समाचार में क्यों?

ईरान की संसद मजलिस ने 25 जून 2025 को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ सहयोग निलंबित करने का एक प्रस्ताव पारित किया। यह निर्णय अमेरिका द्वारा 22 जून को फोर्दो, इस्फ़हान और नतांज़ स्थित ईरानी परमाणु ठिकानों पर हवाई हमलों के बाद आया। इसके साथ ही भारत स्थित ईरानी दूतावास ने भारत के लोगों का समर्थन देने के लिए आभार व्यक्त किया।

निर्णय का विवरण:

  • ईरानी संसद ने IAEA के साथ सभी प्रकार के सहयोग को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया।

  • यह प्रस्ताव सेपाह न्यूज़ (IRGC की आधिकारिक मीडिया शाखा) द्वारा भी पुष्टि किया गया।

  • ईरानी सांसदों ने IAEA पर जासूसी नेटवर्कों से प्रभावित होने का आरोप लगाया और उसकी निष्पक्षता पर प्रश्न उठाए।

ईरान की शिकायतें:

  • ईरान ने कहा कि वह गैर-परमाणु हथियार संपन्न देश है और IAEA तथा परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य होने के बावजूद उस पर हमला किया गया।

  • अमेरिका के हमलों को ईरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया।

  • भारत में ईरानी राजदूत इराज इलाही ने इन हमलों की निंदा करते हुए उन्हें “शांति प्रयासों पर आघात” कहा।

भारत से मिला समर्थन:

  • भारत स्थित ईरानी दूतावास ने भारतीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक नेताओं और राजनेताओं को धन्यवाद दिया।

  • भारत में हुई जनसभाएं, मीडिया वक्तव्य और शांति की अपीलों को ईरान ने नैतिक समर्थन का प्रतीक माना।

प्रभाव और महत्व:

  • यह निर्णय पश्चिमी-नेतृत्व वाले वैश्विक संस्थानों के प्रति ईरान के बढ़ते अविश्वास को दर्शाता है।

  • परमाणु अप्रसार प्रयासों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं।

  • 28 जून को मारे गए ईरानी जनरलों और परमाणु वैज्ञानिकों के लिए आयोजित राजकीय अंतिम संस्कार इस संघर्ष की गहराई को रेखांकित करता है।

निष्कर्ष:
ईरान का IAEA से सहयोग समाप्त करना न केवल पश्चिम के साथ उसके संबंधों में एक बड़े मोड़ को दर्शाता है, बल्कि यह वैश्विक परमाणु निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रभाव डाल सकता है। भारत में ईरान को मिला नैतिक समर्थन इस घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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vikash

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