‘अंजदीप’ का क्या अर्थ है? नौसेना के नए कमीशंड युद्धपोत के नाम के पीछे की कहानी

भारतीय नौसेना ने 27 फरवरी 2026 को चेन्नई पोर्ट पर अत्याधुनिक पनडुब्बी रोधी युद्धपोत आईएनएस अंजदीप को कमीशन किया। इसे नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने औपचारिक रूप से सेवा में शामिल किया। यह पोत एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) परियोजना के तहत तीसरा जहाज है और अपनी विशेष क्षमताओं के कारण इसे “डॉल्फिन हंटर” भी कहा जाता है।

INS अंजदीप: भारत की नई तटीय सुरक्षा ढाल

आईएनएस अंजदीप आठ जहाजों वाले ASW शैलो वाटर क्राफ्ट कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी क्षमता को मजबूत करना है।

  • निर्माण: गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE)
  • अनुबंध हस्ताक्षर: 29 अप्रैल 2019 (रक्षा मंत्रालय और GRSE के बीच)
  • कील बिछाना: 17 जून 2022, कट्टुपल्ली शिपयार्ड
  • जलावतरण: 13 जून 2023
  • कुल निर्माण अवधि: लगभग 4 वर्ष 2 माह

‘अंजदीप’ नाम क्यों?

  • इस युद्धपोत का नाम कर्नाटक के कारवार तट के पास स्थित Anjadip Island से लिया गया है।
  • यह द्वीप ऐतिहासिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। दिसंबर 1961 में गोवा मुक्ति अभियान के दौरान ऑपरेशन चटनी में यहाँ निर्णायक नौसैनिक कार्रवाई हुई थी, जिसने गोवा की मुक्ति में योगदान दिया।
  • इस नामकरण के माध्यम से भारतीय नौसेना ने भारत के समुद्री हितों—विशेषकर तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटीय क्षेत्रों—की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रतीकात्मक रूप से दोहराया है।

‘डॉल्फिन हंटर’ क्यों कहा जाता है?

आईएनएस अंजदीप को “डॉल्फिन हंटर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें उन्नत पनडुब्बी रोधी क्षमताएँ हैं।

इसमें शामिल हैं:

  • हुल-माउंटेड सोनार “अभय”
  • हल्के टॉरपीडो
  • ASW रॉकेट
  • उन्नत ध्वनिक पहचान प्रणाली

सोनार “अभय” डॉल्फिन की तरह ध्वनि तरंगों का उपयोग कर उथले समुद्र में छिपी “साइलेंट” डीजल-इलेक्ट्रिक या छोटी पनडुब्बियों का पता लगा सकता है।

तकनीकी विशेषताएँ

  • लंबाई: 77 मीटर
  • अधिकतम गति: 25 नॉट
  • हाई-स्पीड वाटर-जेट प्रणोदन प्रणाली
  • संकरे तटीय क्षेत्रों में उच्च गतिशीलता
  • उन्नत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम

वॉटर-जेट प्रणोदन प्रणाली इसे तेज प्रतिक्रिया और स्टेल्थ ऑपरेशन की क्षमता देती है, जिससे यह उथले जल में प्रभावी ढंग से कार्य कर सकता है।

पनडुब्बी रोधी युद्ध से आगे

हालांकि यह मुख्य रूप से ASW पोत है, परंतु इसकी भूमिका बहुआयामी है:

  • तटीय निगरानी
  • लो-इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशन
  • खोज और बचाव (SAR) मिशन

इस प्रकार यह युद्ध और मानवीय दोनों प्रकार के समुद्री अभियानों में योगदान देता है।

पेट्या क्लास का उत्तराधिकारी

आईएनएस अंजदीप, 1972 से 2003 तक सेवा देने वाले पेट्या क्लास कॉर्वेट का उत्तराधिकारी है। यह कमीशनिंग “आत्मनिर्भर भारत” पहल के तहत आधुनिक स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

2026: भारतीय नौसेना के लिए मील का पत्थर

  • फरवरी 2026 तक Indian Navy के पास लगभग 145–150 युद्धपोत और पनडुब्बियाँ सेवा में हैं।
  • 2026 में 19 नए युद्धपोत कमीशन किए जाने की योजना है—जो नौसेना के इतिहास में एक रिकॉर्ड संख्या है—और इससे भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता और मजबूत होगी।
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vikash

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