भारतीय नौसेना ने 27 फरवरी 2026 को चेन्नई पोर्ट पर अत्याधुनिक पनडुब्बी रोधी युद्धपोत आईएनएस अंजदीप को कमीशन किया। इसे नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने औपचारिक रूप से सेवा में शामिल किया। यह पोत एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) परियोजना के तहत तीसरा जहाज है और अपनी विशेष क्षमताओं के कारण इसे “डॉल्फिन हंटर” भी कहा जाता है।
आईएनएस अंजदीप आठ जहाजों वाले ASW शैलो वाटर क्राफ्ट कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी क्षमता को मजबूत करना है।
आईएनएस अंजदीप को “डॉल्फिन हंटर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें उन्नत पनडुब्बी रोधी क्षमताएँ हैं।
इसमें शामिल हैं:
सोनार “अभय” डॉल्फिन की तरह ध्वनि तरंगों का उपयोग कर उथले समुद्र में छिपी “साइलेंट” डीजल-इलेक्ट्रिक या छोटी पनडुब्बियों का पता लगा सकता है।
वॉटर-जेट प्रणोदन प्रणाली इसे तेज प्रतिक्रिया और स्टेल्थ ऑपरेशन की क्षमता देती है, जिससे यह उथले जल में प्रभावी ढंग से कार्य कर सकता है।
हालांकि यह मुख्य रूप से ASW पोत है, परंतु इसकी भूमिका बहुआयामी है:
इस प्रकार यह युद्ध और मानवीय दोनों प्रकार के समुद्री अभियानों में योगदान देता है।
आईएनएस अंजदीप, 1972 से 2003 तक सेवा देने वाले पेट्या क्लास कॉर्वेट का उत्तराधिकारी है। यह कमीशनिंग “आत्मनिर्भर भारत” पहल के तहत आधुनिक स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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