भारत में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) दिसंबर 2025 में तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुँच गई, क्योंकि खाद्य कीमतों में गिरावट (डिफ्लेशन) की रफ्तार कम हुई और कोर महंगाई का दबाव बढ़ा। हालांकि, महंगाई अब भी भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के लक्ष्य से काफी नीचे बनी हुई है, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जो नीति-निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों को सतर्क रख रहे हैं।
दिसंबर 2025 में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 1.33% हो गई, जो नवंबर में 0.71% थी। यह आंकड़े राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने जारी किए। यह 2012 आधार वर्ष पर आधारित अंतिम CPI (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) आंकड़ा भी है।
खाद्य कीमतें अब भी डिफ्लेशन में रहीं:
हालांकि, खाद्य कीमतों में गिरावट की रफ्तार कम होने से कुल महंगाई ऊपर गई।
फरवरी 2026 की MPC बैठक को लेकर राय बंटी हुई है:
दिसंबर 2025 में खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी भले ही सीमित हो, लेकिन यह संकेत देती है कि खाद्य कीमतों और कोर महंगाई में दबाव धीरे-धीरे उभर रहा है। फिलहाल महंगाई नियंत्रण में है, लेकिन आने वाले महीनों में RBI की नीतिगत दिशा पर इन रुझानों की अहम भूमिका होगी।
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