भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र ने एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है, जब तेलंगाना में बड़े पैमाने पर ट्राउट मछली पालन परियोजना का शुभारंभ किया गया। अब तक ठंडे हिमालयी क्षेत्रों तक सीमित मानी जाने वाली ट्राउट खेती को गर्म अंतर्देशीय जलवायु में सफलतापूर्वक अपनाया गया है। यह पहल नवाचार-आधारित एक्वाकल्चर, मूल्य संवर्धन और निर्यात-उन्मुख विकास की दिशा में भारत के प्रयासों को दर्शाती है।
क्यों चर्चा में है?
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने तेलंगाना में देश के सबसे बड़े एकीकृत अंतर्देशीय रेनबो ट्राउट फार्म का उद्घाटन किया। रंगा रेड्डी ज़िले में स्थित यह सुविधा उन्नत एक्वाकल्चर इंजीनियरिंग का उदाहरण है, जो गर्म क्षेत्रों में ठंडे पानी की मछली के पालन को संभव बनाती है।
रेनबो ट्राउट फार्म के बारे में
- यह एकीकृत अंतर्देशीय फार्म स्टार्टअप स्मार्टग्रीन एक्वाकल्चर द्वारा लगभग ₹50 करोड़ के निवेश से स्थापित किया गया है।
- इसे डेक्कन पठार की गर्म जलवायु में रेनबो ट्राउट, जो कि ठंडे पानी की प्रजाति है, के पालन के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- उन्नत तापमान नियंत्रण, जल पुनर्चक्रण (Water Recirculation) और बायो-सिक्योर प्रणालियों के माध्यम से यह फार्म दिखाता है कि कैसे तकनीक जलवायु बाधाओं को पार कर सकती है और गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में एक्वाकल्चर का विस्तार कर सकती है।
ट्राउट पालन में पारंपरिक सीमाओं को तोड़ना
- भारत में ट्राउट पालन अब तक मुख्यतः उच्च हिमालयी राज्यों तक सीमित रहा है, क्योंकि इस प्रजाति को ठंडे पानी की आवश्यकता होती है।
- यह परियोजना एक मौलिक बदलाव (Paradigm Shift) का संकेत देती है, जिससे यह सिद्ध हुआ है कि गर्म अंतर्देशीय क्षेत्रों में भी ट्राउट पालन संभव है।
- इस तरह का नवाचार अंतर्देशीय राज्यों के लिए नए अवसर खोलता है, मछली उत्पादन में विविधता लाता है और उच्च-मूल्य एक्वाकल्चर की क्षेत्रीय एकाग्रता को कम करता है।
सरकारी समर्थन और निर्यात पर फोकस
- उद्घाटन समारोह में जी किशन रेड्डी भी उपस्थित थे।
- मत्स्य मंत्री ने राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के माध्यम से ट्राउट मछली के निर्यात को पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया।
- यह पहल भारत के समुद्री खाद्य निर्यात बढ़ाने, किसानों की आय में सुधार और उत्पादन से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करने के लक्ष्य के अनुरूप है।
रेनबो ट्राउट का महत्व
- रेनबो ट्राउट एक उच्च-मूल्य, प्रोटीन-समृद्ध मछली है, जिसकी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में मजबूत मांग है।
- ट्राउट पालन से पोषण सुरक्षा, रोज़गार सृजन और निर्यात आय को बढ़ावा मिलता है।
- एक्वाकल्चर में तकनीक का समावेश जल के सतत उपयोग, उत्पादकता में वृद्धि और जलवायु-लचीले (Climate-Resilient) मत्स्य क्षेत्र की दिशा में भारत को आगे बढ़ाता है।
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